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औरंगाबाद

महंगाई से बिगड़ा पारिवारिक बजट, बढ़ी चिंता

हिन्दुस्तान टीम,औरंगाबादPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 08:20 PM
 महंगाई से बिगड़ा पारिवारिक बजट, बढ़ी चिंता

कोरोना काल में लोगों की कमाई घट गई है और कई जरूरी वस्तुओं के मूल्य आसमान छू रहे हैं। इससे लोगों का पारिवारिक बजट असंतुलित हो गया है। इस बात को लेकर लोग खासे चिंतित हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि बजट कैसे संतुलित होगा। डीजल, पेट्रोल, सरसों तेल, रिफाइन, दाल आदि की कीमतें उम्मीद से ज्यादा बढ़ी हैं। इन वस्तुओं के बढ़ते मूल्य का प्रभाव है कि वाहन किराए में उम्मीद से ज्यादा वृद्धि हुई है। माल ढुलाई में वृद्धि से अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित हुई है। सामान्य श्रेणी के कई लोग बेवजह वाहनों के उपयोग से कतराने लगे हैं। गरीबों की थाली से दाल गायब होती जा रही है। सरसों तेल के उपयोग की मात्रा घटी है। पारिवारिक बजट के संतुलन के लिए कई लोग खर्च में कटौती कर रहे हैं तो कुछ आय बढ़ाने की जुगत में भी है। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि महंगाई की मार से कराह रहे हैं। किसान हों या नौकरी पेशा वाले, व्यवसाई हों या छात्र सबपर इसका असर देखा जा रहा है।---------------------

मृत्युंजय सिंह, किसान

डीजल के मूल्य में वृद्धि से परेशानी बढ़ गई है। खेती का अधिकांश कार्य मशीनों से होता है जिसमें डीजल की जरूरत होती है। डीजल इतना महंगा हो गया है कि किसान खरीद पाने में सक्षम नहीं है। खेत की जुताई व खेती का अन्य कार्य काफी महंगा पड़ रहा है। सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।-------------------

सीमा देवी, गृहणी

महंगाई इतनी बढ़ गई है कि घर का बजट बिगड़ गया है। खर्च रोज बढ़ रहा है और आमदनी सिमट रही है। कैसे परिवार चलेगा कहना मुश्किल है। सरसों तेल, रिफाइंड और दाल के आसमान छूते मूल्य ने बजट बिगाड़ दिया है। घर चलाने के लिए आवश्यक वस्तुओं में कटौती करनी पड़ रही है।---------------

श्वेता कुमारी, छात्रा

बस और ऑटो का किराया इतना ज्यादा हो गया है कि अब क्लास कर पाना मुश्किल है। एक दिन स्कूल या कोचिंग आने और जाने में सौ रुपए खर्च आ रहे हैं। गरीब वर्ग के मां-बाप कितना खर्च कर पाने में सक्षम नहीं हैं। खर्च के चलते वे पढ़ने जाने से मना करते हैं और घर में ही पढ़ने को कहते हैं।

रमेश शर्मा, नौकरी

बढ़ती महंगाई से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। जितने पैसे मानदेय के रूप में मिलते हैं उससे परिवार का गुजारा संभव नहीं है। हर वस्तु का मूल्य रोज बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई लिखाई कैसे होगी और परिवार की गाड़ी कैसे चलेगी समझ में नहीं आ रहा है। परिवार चलाने में काफी परेशानी हो रही है।

नवल राम, मजदूर

मजदूरी कर किसी तरह परिवार की गाड़ी चला रहे हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब यह चलने वाला नहीं है। आवश्यक वस्तुओं की खरीद भी नहीं हो पा रही है। वाहनों का किराया बढ़ गया है। काम भी पर्याप्त नहीं मिल रहा है। जरूरी सामग्रियों की खरीद कर पाने में भी सक्षम नहीं हैं।

मनोज साव, व्यवसाई

आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि से परेशानी हो रही है। खर्च दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। उस अनुपात में आमदनी में वृद्धि नहीं हो रही है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। आय से अधिक व्यय हो रहा है। बचत नाम की कोई चीज नहीं है। परिवार चलाने में परेशानी हो रही है।

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