
भारतमाला परियोजना: मुआवजे को लेकर किसानों और प्रशासन में नोकझोंक
निर्माण कार्य पर आपत्ति, एलपीसी व मुआवजा लंबित होने का आरोप 22 कैप्शन- मौके पर अधिकारियों से बातचीत करते किसान अंबा, संवाद सूत्र। भारतमाला परियोजना के तहत निर्माण का
भारतमाला परियोजना के तहत निर्माण कार्य को लेकर चिरैयाटांड और चिंतावन बिगहा गांवों में सोमवार को किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच नोकझोंक हुई। सीओ चंद्रप्रकाश पुलिस बल और निर्माण एजेंसी की मशीनों के साथ बधार क्षेत्र में कार्य कराने पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि अब तक उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिला है और न ही अंचल कार्यालय से एलपीसी निर्गत हुई है। इसके बावजूद प्रशासनिक दबाव में उनकी जमीन पर कार्य शुरू करा दिया गया, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा। भारतीय किसान यूनियन से जुड़े नेता राजकुमार सिंह ने बताया कि किसान पिछले डेढ़ वर्ष से अंचल कार्यालय और जिला मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन न तो कागजात पूरे हो सके हैं और न ही किसी किसान को मुआवजा मिला है।
किसानों का कहना है कि इस दौरान पके धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और कहा कि परिमार्जन व एलपीसी के लिए बार-बार आवेदन देने के बावजूद प्रगति नहीं हो रही है। भारतीय किसान यूनियन के जिला संयोजक वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने बताया कि 25 अगस्त को पटना में मुख्य सचिव के साथ हुई वार्ता में किसानों की कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर नहीं दिख रहा है। इसके चलते संगठन शीघ्र ही राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री से मुलाकात करेगा और आवश्यक हुआ तो आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। मौके पर सैकड़ों किसान मौजूद थे। सीओ ने कहा कि सारे कार्य नियमानुकूल किए जा रहे हैं। यदि कोई समस्या आ रही है तो उसका भी समाधान किया जा रहा है। किसानों से आवश्यक दस्तावेज भी मांगे गए हैं।

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