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बाल्मीकि के जीवन और चरित्र दोनों अनुकरणीय

हिन्दुस्तान टीम,औरंगाबादNewswrap
Thu, 21 Oct 2021 09:50 PM
बाल्मीकि के जीवन और चरित्र दोनों अनुकरणीय

दाउदनगर स्थित हनुमान मंदिर में बुधवार को महर्षि बाल्मीकि जयंती एंव शरद पूर्णिमा साथ-साथ मनाई गई। उपस्थित लोगों ने बाल्मीकि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। वक्ताओं ने कहा कि महाकाव्य रामायण के रचयिता और संस्कृत भाषा के परम ज्ञानी महर्षि वाल्मीकि वैदिक काल के महान ऋषियों में से एक थे। ऐसी घटना घटित हुई,जिसने उनको बदलकर रख दिया। वाल्मीकि का व्यक्तित्व असाधारण था, यह उनके चरित्र की महानता ही है जिसने उन्हें इतना बड़ा कवि बनाया। उनका जीवन और चरित्र आज भी लोगों के लिए प्रेरणादायी है। कहा गया कि शरद पूर्णिमा के दिन वर्षा ऋतु का समापन होकर शीत ऋतु स्वर्ग से उतरती है। हिंदू रीति-रिवाज के साथ-साथ वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्ष के सभी दिनों में शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी की दूरी सबसे कम रहती है। शरद पूर्णिमा के दिन आसमान साफ रहता है तथा चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। इस अवसर पर पूजा व्यवस्थापक प्रमुख पप्पू गुप्ता, सुनील केसरी, रामजी प्रसाद ,नगर परिषद चेयरमैन प्रतिनिधि कौशलेंद्र सिंह, वार्ड पार्षद दिनेश कुमार, वार्ड प्रतिनिधि प्रशांत कुमार, प्रदुमन कुमार ,चंदन कसेरा, रोहित कुमार सनी कुमार, शंभू कुमार ,विश्वनाथ प्रसाद, धीरज कसेरा आदि उपस्थित थे।

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