Aurangabad News: ओबरा में पहले डिग्री कॉलेज का हुआ उद्घाटन, युवा
Aurangabad News: विधायक, डीएम सहित अन्य लोग हुए शामिल नसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी आदि मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरका

Aurangabad News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ओबरा प्रखंड के राजकीय डिग्री महाविद्यालय, करसांव का उद्घाटन किया।
उद्घाटन समारोह की जानकारी
राजकीय डिग्री महाविद्यालय, करसांव में आयोजित उद्घाटन समारोह में ओबरा विधायक प्रकाश चंद्रा, डीएम अभिलाषा शर्मा, अपर समाहर्ता आपदा उपेंद्र पंडित, दाउदनगर एसडीओ अमित राजन, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी आदि मौजूद थे।
राज्य सरकार की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं समावेशी उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नवस्थापित राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने निकट ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
विधायक का समर्थन
समारोह का उद्घाटन ओबरा के विधायक प्रकाश चंद्रा एवं डीएम अभिलाषा शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप जला कर किया। ओबरा विधायक प्रकाश चंद्रा ने कहा कि राजकीय डिग्री महाविद्यालय, करसांव की स्थापना क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने नामांकन प्रक्रिया को समय से पूर्ण करने का निर्देश दिया।
महाविद्यालय का महत्व
यह महाविद्यालय विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों एवं छात्राओं के लिए वरदान सिद्ध होगा, जिन्हें अब उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इस महाविद्यालय के प्रारंभ होने से क्षेत्र में शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ होगा।
डीएम की अपेक्षाएँ
डीएम ने कहा कि राजकीय डिग्री महाविद्यालय के उद्घाटन के साथ इस क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा का एक नया द्वार खुल रहा है। शिक्षा समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। बिहार सरकार ने सात निश्चय-3.0 के अंतर्गत उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य अभियान प्रारंभ किया है, जिसका उद्देश्य राज्य के प्रत्येक क्षेत्र के विद्यार्थियों को उनके घर के निकट गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस महाविद्यालय की स्थापना से विद्यार्थियों को अब उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी। डीएम ने महाविद्यालय के शिक्षकों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि उनमें नैतिक मूल्यों, अनुसंधान, नवाचार, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का भी विकास करें।


