
उत्पादन बढ़ाने के लिए करें नई तकनीक का इस्तेमाल: डीएम
अररिया में शुक्रवार को विश्व मछलीकी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर डीएम अनिल कुमार और अन्य अधिकारियों ने मछुआरों को स्थायी आजीविका के लिए जल संसाधनों की रक्षा करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में लगभग 200 मत्स्य कृषक और सहयोग समितियों के सदस्य शामिल हुए। मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग करने पर जोर दिया गया।
अररिया, संवाददाता शुक्रवार को समाहरणालय स्थित परमान सभागार में आयोजित विश्व मा्स्यियकी दिवस के मौके पर जिले के मत्स्य कृषक और मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन डीएम अनिल कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी बालकृष्ण गोपाल और प्रगतिशील मत्स्य पालक प्रभात कुमार सिंह आदि ने संयुक्त रूप से किया। जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस मौके पर ओएसडी दिलीप कुमार भी उपस्थित थे। बताया गया कि कार्यक्रम में जिले के करीब 200 मत्स्य कृषक और प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का स्वागत करते हुए जिला मत्स्य पदाधिकारी ने मा्स्यियकी दिवस की महत्ता और उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि इस दिवस का आयोजन मत्स्य संसाधनों और उसके परिस्थिति तंत्र को आगे की पीढ़ियों के लिए प्रचुरता और विविधता के साथ बचाए रखने के उद्देश्य से मछुआरों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए किया जाता है। ताकि पीढ़ी दर पीढ़ी उनका रोजगार बना रहे। वहीं इस मौके पर डीएम श्री कुमार ने मछुआरा समाज का आवाह्न किया कि वे अपनी जीवीका को स्थाई रूप से बनाए रखने के लिए जल संसाधनों और उनके पर्यावरण और परिस्थितिकी को बचाए रखने के लिए सचेत और जिम्मेदार रहें। तभी उनकी अगली पीढ़ी के लिए रोजगार बना रहेगा। डीएम ने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए ही शिकारमाही करें, अवैध तरीके से नहीं। तभी उनके समुदाय का भला हो सकेगा। उन्होंने सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने और जलकरों का बेहतर प्रबंधन करने के लिए भी प्रेरित किया। ताकि मत्स्य पालकों का जीवन स्तर समृद्ध हो सके। बताया गया कि डीएम ने किसानों और मछुआरों से आहवान किया कि वे मत्स्य पालन की नई तकनिकों का उपयोग कर मत्स्य उत्पादन को बढ़ाएं। ताकि अररिया जिला मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर हो सके। साथ ही दुसरे जिलों को भी निर्यात किया जा सके। उन्होंने जिले में मत्स्य बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु हैचरी संचालक को आवश्यक निर्देश भी दिया। साथ ही उन्होंने मत्स्य पालक किसानों से कहा कि वे अपने तालाब के कुछ भाग में नवाचार तकनीक अपनाएं ताकि उनकी आय बढ़ सके। मत्स्यजीवी सहयोग समितियों द्वारा जलकरों के अतिक्रमण विषय पर उठाये गए मामलों को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने मत्स्यजीवी सहयोग समितियों से कहा कि वे अतिक्रमित जलकरों की सूची जिला मत्स्य पदाधिकारी के माध्यम उपलब्ध कराएं। कार्रवाई निश्चित रूप से की जायेगी। वहीं कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में मत्स्य विभाग के क्षेत्रीय पदाधिकारीयों द्वारा मत्स्य पालकों को केन्द्र प्रायोजित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और राज्य सरकार द्वारा संचालित चौर विकास सहित अन्य योजनाओं के लिए जरूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। इस अवसर पर जिला मत्स्य कार्यालय के सभी पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

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