DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   बिहार  ›  अररिया  ›  मौनसून के दस्तक देने के साथ ही सहम जाते हैं ग्रामीण
अररिया

मौनसून के दस्तक देने के साथ ही सहम जाते हैं ग्रामीण

हिन्दुस्तान टीम,अररियाPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 06:01 PM
मौनसून के दस्तक देने के साथ ही सहम जाते हैं ग्रामीण

अररिया। वरीय संवाददाता

मौनसून का दस्तक दिये जाने के साथ ही ग्रामीण इलाके के लोग एक बार फिर सहम गये हैं। वर्ष 2017 में आई प्रलयंकारी बाढ़ उनके जेहन में अनायस आ जाते हैं। लोग सिहर उठते हैं। इस बाढ़ में न केवल सैकड़ों गांव की हजारों कच्चे मकान गिर गये, हजारों एकड़ खेत में लगी फसल बह गई बल्कि कई बांध भी ध्वस्त हो गए। इन चार सालों में कई बांध दुरूस्त किये गये तो कई निर्माणाधीन हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी तटबंध हैं जो अभी तक प्रशासन की नजर से ओझल हैं। जरूरत है ऐसे तटबंध को चिह्नित कर दुरूस्त करने की। अन्यथा यदि फिर ऐसी बाढ़ आई तो भारी तबाही मचा सकती है।

रहटमीना व सौरगांव में आठ जगह टूटे हैं तटबंध: वर्ष 2017 में आई प्रलयंकारी बढ़ में परमान नदी पर रहटमीना बाबाजी अखाड़ा से सौरगांव पानी टंकी तक बने तटबंध कई जगह टूट गये थे। लेकिन चार वर्ष बाद भी तटबंध का मरम्मत नहीं हुआ। नतीजतन करीब 40 हजार की आबादी को तबाही झेलनी पड़ती है। ग्रामीण रेवती रमण मंडल ने बताया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन विधायक प्रदीप कुमार सिंह ने तटबंध का निर्माण करवाया था। तटबंध के निर्माण होने से लोगों को बाढ़ राहत मिली। लेकिन 2017 में आई बाढ़ ने इस बांध को आठ जगहों पर क्षतिग्रस्त कर दिया। मरघटिया टोला के पास, मिल्की प्राथमिक विद्यालय के पास, मिल्की में बरकुरवा टोला के सामने व बरकुरवा से पश्चिम में कई जगहों पर बांध टूटा हुआ है। इसके लिए कई बार जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को भी कहा गया, लेकिन अब तक स्थिति जस का तस है। हालांकि एक माह पूर्व डीडीसी व मनरेगा के अधिकारी भी निरीक्षण कर गए हैं। लेकिन किसी ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध की मरम्मती हो जाने सौरगांव पंचायत का तीन वार्ड और रहटमीना पंचायत के भी तीन वार्ड में बाढ़ का खतरा कम हो जायेगा। तटबंध जर्जर रहने से लोगों के घरों में परमान नदी का पानी घुस जाता है। अच्छी बात ये कि कुर्साकांटा पंचायत के शिशुआकोल से उत्तर बकरा नदी के पश्चिमी पार में खुटाहरा तक 15 वर्ष पूर्व बने तटबंध जर्जर हो गया था। लेकिन इस वर्ष मनरेगा से दुरुस्त कर लिया गया है।

दवाब बढ़ने पर थाकी व चन्द्रशेखर बांध पर खतरा: जोकीहाट प्रखंड में दो महत्वपूर्ण बांध हैं: थाकी व चन्द्रशेखर बांध। थाकी कनकई नदी पर बना है। दोनो बांध काफी पुराना है। हार साल मरम्मत होती है। फिलहाल दोनो बांध ठीक है। मगर कनकई नदी मे जलस्तर की वृद्धि होने पर पानी की अधिक के कारण थाकी बांध के टूटने की आशंका बनी रहती है। हाल ही में प्रशासन की टीम ने इस बांध पर पहुंच कर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। दूसरी तरफ परमान नदी पर बने चन्द्रशेखर बांध महलगांव थाना क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को परमान नदी के पानी की तबाही से बचाने के लिए बनाया गया है। यह भी काफी पुराना है। वर्तमान में इसकी स्थिति अच्छी है, मगर पानी का दवाब बढ़ने पर खतरा बढ़ जाता है।

दहगांव बांध टूटनेसेबनी नदी की नइ धारा: सिकटी प्रखंड होकर बहने वाली नूना नदी ने पिछले साल दहगांव बांध को तोड़ते हुए नई धारा बना ली है। इससे क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने बताया कि नूना नदी की नई धारा दहगांव, सालगोड़ी, कचना, कठुआ, बांसबाड़ी गांव होते हुए पलासी के धर्मगंज में चली गई है। यदि दहगांव बांध को दुरूस्त कर नदी को पुरानी धारा में लौटाने का प्रयास हुआ तो काफी हद तक समस्या दूर हो सकती है। इसके लिए प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को सक्रिय पहल करनी होगी।

मदनपुर मरिया बकरा के ध्वस्त बांध नहीं हुए मरम्मत: 2017 की भीषण बाढ़ में अररिया सदर प्रखंड के मदनपुर पूर्वी पंचायत होकर बहने वाली मरिया बकरा नदी पर बने तटबंध ध्वस्त हो गये थे। काफी मशक्कत के बाद कुछ सप्ताह पूर्व मनरेगा से मरम्मत का काम शुरू हुआ लेकिन बरसात का बहाना बनाकर इसे छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि ढाई दर्जन गड्ढों में से केवल 5-6 गड्ढों को ही भरा गया। ग्रामीणों ने कहा कि इस बार भी उन्हें बांध से होकर आने वाले बाढ़-पानी का दंश झेलना पड़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ की समस्या को देखते वर्ष 2007-08 में इस तटबंध का निर्माण किया गया था। लेकिन 2017 की प्रलयंकारी बाढ़ में तटबंध दर्जनों जगहों पर ध्वस्त हो गया था। ध्वस्त होने के बाद हर साल मदनपुर सहित आधा दर्जन गांवों में बाढ़ आ रही है।

बजगिरवा व ककोड़वा बांध की स्थिति फिलहाल ठीक: पलासी प्रखंड क्षेत्र में बकरा नदी पर बने बजगिरवा तथा ककोड़वा मीर भाग तटबंध बने हैं। फिलहाल इन दोनों तटबंधों की स्थिति ठीक है। बजगिरवा तटबंध 2017 के बाढ़ में ध्वस्त हो जाने के बाद बना था। जबकि मीर भाग ककोड़वा तटबंध एक दशक पुराने हैं। ग्रामीणों के अनुसार ये दोनों तटबंधों पर आवश्यकता अनुसार बाढ़ से पूर्व मरम्मती कार्य की जा रही है। हालांकि इस तटबंध के समीप रह रहे ग्रामीणों में भीषण बाढ़ आने पर भय व दहशत बना रहता है। सीओ विवेक कुमार मिश्र ने दावा किया कि उक्त दोनों तटबंध सुरक्षित है।

बोले अधिकारी: बांध की मरम्मती को लेकर जिला प्रशासन गंभीर हैं। अधिकारियों व अभियंताओं को हिदायत दी जा चुकी है। वे खुद इसका मॉनीटरिंग कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण कार्य करने की हिदायत दी गई है। कई महत्वपूर्ण बांध दुरूस्त किये जा चुके हैं। कई पर नजर है।

-प्रशांत कुमार सीएच, डीएम, अररिया।

संबंधित खबरें