वाहन साफ करने के लिए बड़े पैमाने पर भूजल पानी का होता है उपयोग
रानीगंज में कई वाहन धुलाई केंद्र बिना जल संरक्षण व्यवस्था के संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन हजारों लीटर भूजल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जल संकट बढ़ रहा है। छोटे केंद्रों के पास अनुमति नहीं है और जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था भी नहीं है। प्रशासन को इन केंद्रों की जांच करनी चाहिए।

रानीगंज। एक संवाददाता। प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ो जगहों में इन दिनों बिना किसी स्पष्ट मानक और जल संरक्षण व्यवस्था के बड़ी संख्या में वाहन धुलाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन हजारों लीटर भूजल का उपयोग वाहनों की सफाई में किया जा रहा है, जिससे जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। इस भीषण गर्मी के मौसम में जहां एक ओर लोग पेयजल संकट और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वाहन धुलाई केंद्रों में पानी की बड़े पैमाने पर बर्बादी चिंता का विषय बनती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक एक चार पहिया वाहन को धोने में औसतन 100 से 300 लीटर तक पानी खर्च हो जाता है।
यदि किसी सर्विसिंग स्थल पर प्रतिदिन 20 से 30 वाहनों की धुलाई की जाती है तो हजारों लीटर शुद्ध पानी केवल वाहन साफ करने में ही बहा दिया जाता है। प्रखंड क्षेत्र में संचालित अधिकांश छोटे वाहन धुलाई केंद्रों के पास न तो जल संरक्षण की कोई व्यवस्था है और न ही जल पुनर्चक्रण (वाटर रीसाइक्लिंग) की सुविधा उपलब्ध है। यही गाड़ी धोने वाले नहीं लगभग सर्विसिंग सेंटर सड़क किनारे है जिससे गाड़ी का गंदा पानी सड़क पर बहाया जाता है। सड़क पर पानी बहने के कारण सर्विसिंग सेंटर के सामने वाली जगज की सड़कें भी खराब हो रही है।कई धुलाई केंद्र सीधे बोरिंग के माध्यम से भूजल निकालकर वाहनों की सफाई करते हैं। पानी के उपयोग की कोई सीमा निर्धारित नहीं होने के कारण जरूरत से अधिक पानी बहाया जाता है। छोटे वाहन धुलाई केंद्रों के पास (पीएचईडी) या अन्य कोई संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति भी नहीं होती है। इसके बावजूद ऐसे केंद्र धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। जल संरक्षण के प्रति उदासीनता के कारण भविष्य में भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। वाहन धुलाई केंद्रों में जल पुनर्चक्रण प्रणाली को लेकर जाबाबदेह चुप्पी साधे है। जल पुनर्चक्रण के माध्यम से उपयोग किए गए पानी को फिल्टर कर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे 60 से 80 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है। साथ ही प्रशासन को भी ऐसे केंद्रों की जांच कर आवश्यक मानकों का पालन सुनिश्चित कराना चाहिए। बढ़ते जल संकट के बीच पानी की प्रत्येक बूंद की अहमियत है। इधर पीएचईडी के एसडीओ अमर कुमार ने बताया कि नगर क्षेत्र में सर्विसिंग सेंटर के लिए बुडको से अनुमति लेनी चाहिए।
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