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हत्या मामले में दो युवकों को आजीवन कारावास की सज़ा

अररिया, विधि संवाददाता तीन वर्ष पूर्व हुए हत्या का मामला प्रमाणित होने पर जिला...

हत्या मामले में दो युवकों को आजीवन कारावास की सज़ा
हिन्दुस्तान टीम,अररियाWed, 15 May 2024 12:01 AM
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अररिया, विधि संवाददाता
तीन वर्ष पूर्व हुए हत्या का मामला प्रमाणित होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षित सिंह ने मंगलवार को दो युवकों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। आजीवन कारावास के अलावा दोनो आरोपियों को आर्थिक दंड के रूप में विभिन्न धाराओं में 20-20 हज़ार का जुर्माना भी लगाया है। सज़ा पाने वालों में फारबिसगंज रामपुर दक्षिण निवासी 26 वर्षीय मो सद्दाम पिता मो बुधन व 22 वर्षीय मो अजमूल पिता मो मुस्तकीम शामिल हैं। यह सजा एसटी 22/2022 में सुनाई गई है। जानकारी देते हुए सरकार की ओर से लोक अभियोजक (पीपी) लक्ष्मीनारायण यादव ने बताया कि दोनो आरोपी योजनाबद्ध तरीके से फारबिसगंज रामपुर दक्षिण निवासी साहेब मंसूरी को बाइक पर बैठा कर सुनसान स्थान पर ले गये। फिर धारदार चाकू से गोदकर उसकी निर्मम हत्या की दी। यही नहीं हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने के लिए चकरदाहा कजराधार रेलवे ढाला के निकट झाड़ी में साहेब मंसूरी के शव को फेंक दिया, जहां से पुलिस ने साहेब मंसूरी का शव का बरामद किया था। लोक अभियोजक लक्ष्मीनारायण यादव ने बताया कि घटना स्थल से पुलिस ने स्टील का छोटा धारदार चाकू व जूट का पुराना बोरा भी बरामद किया था। लोक अभियोजक ने बताया कि इस मामले में मृतक साहेब मंसूरी के पिता मो नज़ीर मंसूरी ने फारबिसगंज थाना में गुमशुदगी को लेकर 441/21 के तहत मामला दर्ज कराया गया था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस हरकत में आई । इसके बाद साहेब मंसूरी का शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस से दोनो अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में धारा 302 व 201 के तहत चार्जशीट दाखिल किया। न्यायालय में 24 मई 2022 को आरोप गठन (चार्जफ्रेम) के बिन्दु पर दोनो अभियुक्तों ने अपने आप को निर्दोष बताया था। जबकि चार्जफ्रेम के बाद सरकार की ओर से प्रस्तुत सभी साक्षियों ने घटना का पूर्ण समर्थन किया।

लोक अभियोजक ने बताया कि साक्षियों के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायधीश हर्षित सिंह ने दोनो आरोपियों को दोषी पाया। सज़ा के बिन्दु पर आरोपी सद्दाम की ओर से डीएलएसए लीगल एड डिफेन्स काउंसिल के चीफ सह वरीय अधिवक्ता विनय कुमार ठाकुर व आरोपी मो अजमूल के अधिवक्ता रविन्द्र कुमार विश्वास ने अपने-अपने पक्ष रखे।

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