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कर्नल अजित दत्त की स्मृति में समारोह आयोजित

कर्नल अजित दत्त की स्मृति में समारोह आयोजित

संक्षेप:

फारबिसगंज में पं. रामदेनी तिवारी द्विजदेनी क्लब द्वारा कर्नल अजित दत्त की स्मृति में समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उनके जीवन, साहसिक कार्यों और साहित्यिक उपलब्धियों पर चर्चा की गई। कर्नल दत्त का जन्म 1948 में हुआ और उन्होंने भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए।

Dec 15, 2025 11:57 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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फारबिसगंज, एक संवाददाता। पं. रामदेनी तिवारी द्विजदेनी क्लब के द्वारा सोमवार को स्थानीय प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पीडब्ल्यूडी परिसर में स्थानीय साहित्यकार एवं पर्वतारोही कर्नल अजित दत्त की स्मृति में समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रसाद मंडल ने की। इस मौके पर सर्वप्रथम कर्नल अजित दत्त की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पण किया गया। तदुपरांत शिव नारायण चौधरी, क्लब के संस्थापक सचिव विनोद कुमार तिवारी,अध्यक्ष हेमंत यादव, उपाध्यक्ष अरविन्द ठाकुर,पूर्व प्राचार्य हरिशंकर झा,युवा कवि दिवाकर कुमार दिवाकर, सुनील दास,हरि नंदन मेहता और सभाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद मंडल ने कर्नल दत्त के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। वक्ताओं ने कहा कि कर्नल अजित दत्त का जन्म 18 जुलाई 1948 ई. को मधेपुरा जिले के खजूरी गांव में हुआ था और उनका निधन 9 दिसंबर 2022 को हुआ था।

उनकी माता सत्या देवी शिक्षिका और पिता रामकृष्ण दत्त स्वतंत्रता सेनानी थे। 1970 में सीडीएस परीक्षा पास कर वे सेना में अफसर बने। जीवन में रोमांच की तलाश में विभिन्न साहसिक कार्यों को करते हुए पर्वतारोहण में काफी नाम और यश कमाया। 1982 में उनके नेतृत्व में अरुणाचल प्रदेश में न्यूरा घाटी की खोज हुई। उन्होंने भारतीय सेना के अनेकों पर्वतारोहण अभियान का सफल संचालन किया। वे दार्जिलिंग के हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टिट्यूट और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी के प्राचार्य भी बने । उन्होंने 1991 के स्पेन में अंतर्राष्ट्रीय पर्वतारोहण समिट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्विट्जरलैंड ,इंग्लैंड,मलेशिया,फ्रांस,अमेरिका,ईरान आदि अनेक देशों की यात्राएं की। सेवा से अवकाश प्राप्ति के बाद फारबिसगंज स्थित प्रोफेसर कॉलोनी में रहते थे। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सेना अवार्ड से सम्मानित किया गया था। उनकी अंग्रेजी में 9 पुस्तकें और हिंदी में लगभग एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हैं। वक्ताओं ने उनकी साहित्यिक उपलब्धि पर विस्तृत चर्चा की। विशेष कर उनकी पुस्तक फारबिसगंज जंक्शन जिसमें यहां का इतिहास विस्तृत रूप से दर्ज है। वह स्थानीय साहित्यिक संस्था इंद्रधनुष साहित्य परिषद के अध्यक्ष भी रहे। 2013 में राज्यपाल द्वारा उन्हें रेणु साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया था। इस अवसर पर देवेंद्र कुमार दास, नागेंद्र शुक्ला, पलकधारी मंडल, वामदेव झा सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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