Three beads will be made in the arena of Farbisganj - तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नप DA Image

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तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नप

तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नप

1 / 3तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नगर परिषद। नौ जून के बाद बोर्ड के खिलाफ अविश्वास का दरवाजा खुल जाएगा और दो देवियों ने अविश्वास लगाने के लिए कमर कस ली है। यहां तक की कागजी सारी...

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2 / 3तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नगर परिषद। नौ जून के बाद बोर्ड के खिलाफ अविश्वास का दरवाजा खुल जाएगा और दो देवियों ने अविश्वास लगाने के लिए कमर कस ली है। यहां तक की कागजी सारी...

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3 / 3तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नगर परिषद। नौ जून के बाद बोर्ड के खिलाफ अविश्वास का दरवाजा खुल जाएगा और दो देवियों ने अविश्वास लगाने के लिए कमर कस ली है। यहां तक की कागजी सारी...

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तीन देवियों की राजनीति का अखाड़ा बनेगी फारबिसगंज नगर परिषद। नौ जून के बाद बोर्ड के खिलाफ अविश्वास का दरवाजा खुल जाएगा और दो देवियों ने अविश्वास लगाने के लिए कमर कस ली है। यहां तक की कागजी सारी खानापूरी भी कर ली गई है। फिलहाल सुनीता जैन मुख्य पार्षद की कुर्सी पर आसीन हैं।

अविश्वास प्रस्ताव के लिए जिन दो देवियों ने कमर कसी है उसमें वार्ड 19 की पार्षद गुंजन सिंह और वार्ड 11 की पार्षद चंदा देवी प्रमुख हैं। दोनों पार्षदों के नेतृत्व में अविश्वास के लिए सारे मापदंडों को पूरा कर लिए जाने की बात सामने आई है। और देरी है तो सिर्फ 9 जून 2019 के बीतने की। कहते हैं विगत 9 जून 2017 को फारबिसगंज के बोर्ड का गठन हुआ था। तब 17 पार्षदों के साथ सर्वसम्मति से सुनीता जैन मुख्य पार्षद निर्वाचित हुई थी।

दूसरे गुट के 8 पार्षदों द्वारा चुनाव का वॉकआउट कर दिया गया था। गठन के बाद से बोर्ड हमेशा से विवादों में रहा है। विकास कार्य के नाम पर नप फिसड्डी साबित हुई है। हालांकि कुछ महीने पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में दीपक कुमार के योगदान के बाद में विकास के प्रति थोड़ी सुगबुगाहट जगी है मगर दो वर्षों में शहरवासियों को निराशा ही हाथ लगी है। और सभी अपने-अपने पार्षदों से ठगा ठगा महसूस कर रहे हैं।

प्रावधान के तहत बोर्ड गठन के दो वर्ष के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव लगाया जा सकता है। लिहाजा लंबे समय से अविश्वास की तैयारी जारी है मगर जैसे-जैसे समय नजदीक आता गया है वैसे-वैसे पार्षदों की मुख्य पार्षद पद के प्रति चाहत बढ़ती जा रही है। दो पार्षद खुलकर मैदान में उतरकर तैयारी को अंतिम रूप देने में जुट गई है।

अविश्वास के लिए जरूरी 13 पार्षदों के समर्थन का दोनों पार्षदों द्वारा दावा किया जाना शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो पार्षदों को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद यानी चारों प्रक्रिया को अपनायी जा रही है। एक खास बात यह कि विगत 2 वर्षों से विकास की रफ्तार नगर परिषद में लगभग ठहर सी गयी है लिहाजा इसका समायोजन अगले वर्ष होने के आसार को लेकर मोटी कमाई के निमित्त पार्षदों के भावों में भी थोड़ा उछाल के आसार हैं।

इधर इस संबंध में मुख्य पार्षद सुनीता जैन ने कहा कि यह सही है कि अविश्वास प्रस्ताव लगाने का समय आ गया है और दो तरफ से अविश्वास लगाने की तैयारी चल रही है। मगर बोर्ड को बचाना और अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करना उनका मकसद होगा। वहीं पार्षद गुंजन सिंह और चंदा देवी ने भी अपनी ओर से तैयारी पूरी होने की बात कही है।

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