अत:करण को शुद्ध बनाना ही सत्संग और ध्यान का मुख्य उद्देश्य: संत
फारबिसगंज के भागकोहलिया पंचायत में संतमत सत्संग मंदिर में एक सप्ताह का ध्यान-अभ्यास और ज्ञान-यज्ञ समारोह संपन्न हुआ। संत-महात्माओं ने सत्संग और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला, कहा कि यह ईश्वर की भक्ति और आत्मा की शुद्धता के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम में भजन और सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया।

फारबिसगंज, एक संवाददाता। प्रखंड के भागकोहलिया पंचायत के चौरा परवाहा स्थित संतमत सत्संग मंदिर में पिछले सात दिनों से चल रहे सप्ताह ध्यान-अभ्यास और ज्ञान-यज्ञ समारोह का समापन शनिवार को प्रात: कालीन तथा अपराह्न कालीन सत्संग के बाद हो गया। दोनों पाली के सत्संग के प्रारंभ में सामूहिक रूप से गुरु महाराज की स्तुति-विनती तथा पाठ किया गया। इसके बाद कुप्पा घाट, उत्तर काशी तथा नेपाल आदि से आए जवाहर बाबा,स्वरूपा नंद बाबा,नेपाल के वीरेंद्र बाबा, देवकीनंदन बाबा,कैलाश बाबा, सुबोध बाबा, बुद्धिनाथ बाबा,मंगल बाबा,बिंदु बाबा,अमोल बाबा आदि संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में कहा कि हमलोगों को नित्य सत्संग और ध्यानाभ्यास करना चाहिए।
अपने अत: करण को शुद्ध बनाना ही सत्संग और ध्यान का मुख्य उद्देश्य है। हमलोग आलस में पड़कर सत्संग और ध्यान नहीं करते हैं। सत्संग करने से ईश्वर की भक्ति करने की प्ररेणा मिलेगी। ध्यान और सत्संग एक अमूल्य निधि है,जिसके द्वारा संसार के ताप और पंचपाप से बचा जा सकता है। जो गुरु का ध्यान और सत्संग करता है उसको जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।कहा कि असल में गुरु ही ज्ञान स्वरूप हैं। जैसे एक अक्षर जानने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है, उसी तरह इस आध्यात्म ज्ञान को सिखाने वाले गुरु की आवश्यकता होती है और इनकी बड़ी महिमा है। गुरु को ईश्वर के तुल्य कहा गया है और कहीं- कहीं ईश्वर से भी बढ़कर। संत महात्माओं के प्रवचनों के बाद मुनीलाल बाबा और उमेश यादव ने अपने सुमधुर स्वर में कई भजन सुनाए,जिसमें सभी श्रद्धालु सत्संगी आनंद के गोते लगाते रहे। अंत में आरती की गई। इसके बाद सामुहिक भंडारा का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। सातों दिन मंच का संचालन सीताराम सहयोगी ने किया। इस ध्यान-अभ्यास तथा ज्ञान-यज्ञ को सफल बनाने में महेंद्र साह,शंकर साह,सुरेन्द्र मंडल,देवनारायण चौधरी,मनोज साह तथा हेमंत यादव आदि का विशेष सहयोग रहा।
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