
रानीगंज में पांच लाख आबादी में हैं मात्र तीन एमबीबीएस डॉक्टर
रानीगंज। एक संवाददाता। इन दिनों ठंड शुरू होते ही रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में हर
रानीगंज। एक संवाददाता। इन दिनों ठंड शुरू होते ही रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में हर दिन में ओपीडी में सौ से डेढ़ सौ मरीजों का इलाज किया जाता है। वहीं करीब 30 से 50 मरीज इमरजेंसी में हर रोज घटना व दुर्घटना सहित अन्य रोगों से पीड़ित लोग इलाज के लिए पहुंचते है। लगभग एक दर्जन से अधिक गर्भवती महिलाओं का प्रसव रोजाना किया जाता है। पिछले महीने रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में पांच सौ गर्भवती महिलाओं का प्रसव करवाया गया है। पूरे प्रखंड के सभी एपीएससी, एचडब्ल्सूसी को मिलाकर हर महीने लगभग 20 से 25 हजार लोगों का इलाज किया जाता है।
इतने मरीजों के इलाज के लिए रानीगंज प्रखंड क्षेत्र के लगभग पांच लाख की आबादी में केवल तीन एमबीबीएस डॉक्टर है। इतनी बड़ी आबादी में दस आयुष डॉक्टर है। जबकि केवल रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में दस एमबीबीएस डॉक्टर की आवश्यकता है। इन चिकित्सकों में इनमें एक भी किसी रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। रानीगंज में न हड्डी, न शिशु, न स्त्री, न गला, नाक व कान, आदि कोई रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं रहने के कारण यहां की एक बड़ी आबादी को बेहतर इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं रहने के कारण नवजात शिशुओं के इलाज के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ता है। जबकि रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में रोजाना करीब एक दर्जन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है। पांच एपीएससी, आठ हेल्थ वेल्थ सेंटर: रानीगंज में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावे अन्य विभागों के डॉक्टरों की भी घोर कमी है। रानीगंज के लगभग एपीएससी मोटे तौर पर एएनएम के भरोसे ही चल रहा है। रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में तीन एमबीबीएस डॉक्टर है। केवल तीन एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे रानीगंज के 30 पंचायत व एक नगर पंचायत की करीब पांच तीन की आबादी निर्भर है। रानीगंज में हैं 40 हेल्थ एंड वेल्थ केंद्र: रानीगंज क्षेत्र में पांच अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इनमें बेलसरा, बसेटी, मिर्जापुर, गितवास, और परसाहाट है। वहीं हेल्थ ऐंड वेल्थ सेंटर में कमलपुर, बिशनपुर, बड़हरा, राघोपुर, हिंगना, रामपुर, और परसाहाट हाँसा, आदि है। अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं: रानीगंज रेफ़रल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रोहित कुमार ने बताया कि रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में आम जरूरत की लगभग 230 तरह की दवाइयां मौजूद है। इनमें जरूरी एंटीबायोटिक, पैरासिटामोल, दर्द की दवा, खुजली, रैबीज, सर्पदंश की इंजेक्शन, निमोनिया, आदि की दवाइयां उपलब्ध है। जबकि रानीगंज में सरकारी स्तर पर अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं है। हालांकि रानीगंज रेफ़रल अस्पताल में एक्सरे की सुविधा उपलब्ध है। जबकि टीवी, ट्रुलर, एचआईवी, ब्लड शुगर, डेंगू, सीभीसी, हीमोग्लोबिन, एचबीएस, कालाजार, आदि की जांच की जाती है। रानीगंज रेफ़रल अस्पताल के प्रबंधक रवि कुमार ने बताया कि कम डॉक्टरों की उपलब्धता के बाबजूद पिछले साल अक्टूबर महीने में भव्या ऑनलाइन के जरिये इलाज करने में पूरे बिहार में रानीगंज का पहला स्थान था। यही नहीं ओपीडी में सबसे अधिक मरीजों को दवाई दिया गया था। रानीगंज के सुदूर इलाकों में लोगों की कई तरह की जांच कर दवाई दी जाती है। एएनएम के द्वारा फील्ड में जाकर गर्भवती महिलाओं के एचआइवी की जांच की जाती है। यदि कोई मोतियाबिंद या हाइड्रोसील के ऑपरेशन के लिए आता है तो उनको एम्बुलेंस से इलाज के लिए सदर अस्पताल अररिया भेजा जाता है। इधर किसी भी कारणवश भर्ती हुए मरीजों को तीन टाइम का भोजन व ठंड से बचने के लिए कंबल आदि दिया जाता है।

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