जमीन से जबरन मिट्टी काटने का आरोप, महादलित किसानों ने किया प्रदर्शन
भरगामा, एक संवाददाता जमीन से जबरन मिट्टी काटने का आरोप लगाते हुए भरगामा

भरगामा, एक संवाददाता जमीन से जबरन मिट्टी काटने का आरोप लगाते हुए भरगामा प्रखंड के मानुल्लहपट्टी पंचायत स्थित गोलहा गांव के महादलित किसानों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। आक्रोशित महादलित प्रदर्शनकारी किसान अररिया-सुपौल निर्माणाधीन रेल लाइन परियोजना के लिए उनकी जमीन से जबरन मिट्टी काटे जाने का आरोप लगा रहे थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने इस दौरान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। किसान गिरानंद ऋषिदेव ने आरोप लगाया कि वर्तमान में भी करीब 45 डिसमिल में लगी मक्का फसल वाले खेत से जबरन मिट्टी काटने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध करने पर कर्मियों द्वारा जमीन को किसी अन्य व्यक्ति की बताकर काम जारी रखने की बात कही गई।
उन्होंने आरोप लगाया है कि रेल लाइन निर्माण में लगी एजेंसी के कर्मियों ने उनकी लगभग एक एकड़ 48 डिसमिल जमीन से बिना पूर्व सूचना या अनुमति के मिट्टी काट ली गई थी। उस समय वे इलाज के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे। लौटने पर खेत की बदली स्थिति देखकर उन्हें घटना की जानकारी मिली। वही प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना था कि खेसरा संख्या 747 में आचारी देवी के नाम 40 डिसमिल जमीन का एग्रीमेंट किया गया था, लेकिन मिट्टी काटने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। इसी खेसरा में रजिया देवी की 40 डिसमिल जमीन से भी मिट्टी ली गई है। खेसरा 748 में डोना देवी (17 डिसमिल) और विमला देवी (12 डिसमिल) की जमीन से भी मिट्टी कटाई का आरोप है, परंतु अब तक राशि का भुगतान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि नवंबर माह में रातों-रात बड़ी मशीनों से करीब 20 फीट गहराई तक मिट्टी काट ली गई, जिससे आसपास की जमीन पर भू-स्खलन की स्थिति बन गई है। इससे खेती करना कठिन हो गया है और उपजाऊ क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। प्रदर्शन में डोना देवी, गीता देवी, सुशीला देवी, मेंटी देवी, तीलिया देवी, जुनिया देवी, रीता देवी, बुधनी देवी, जहानी देवी, ननकी देवी, केविया देवी, सतनी देवी, महेंद्र ऋषि, गजेंद्र ऋषि एवं परमेश्वरी ऋषि समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे। गिरानंद ऋषिदेव का कहना है कि वे पिछले 25 वर्षों से उक्त भूमि पर खेती कर रहे हैं। जमीन उन्हें लाल कार्ड के माध्यम से आवंटित की गई थी और राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद न तो भूमि अधिग्रहण संबंधी कोई नोटिस दिया गया और न ही मुआवजे की सूचना। ग्रामीणों का आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर और दलित परिवारों की जमीन को निशाना बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मक्का लगी फसल वाले खेतों से तत्काल मिट्टी कटाई पर रोक लगाई जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो तथा जिन किसानों की जमीन से मिट्टी काटी गई है, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही भू-स्खलन से प्रभावित आसपास के किसानों को भी क्षतिपूर्ति दी जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रखंड मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेंगे। इधर ठेकेदार व उनके लोगों व रेलवे काम करा रहे कर्मियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। रेलवे कार्य करा रहे सुमन जायसवाल ने कहा कि किसानों से विधिवत एग्रीमेंट कर ही जमीन ली गई है। जबरन मिट्टी काटने के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि जिनसे समझौता हुआ है, उन्हें नियमानुसार भुगतान किया जा रहा है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।



