
अतिक्रमण की चपेट में पलासी बस पड़ाव, जल्द हो अतिक्रमणकारियों से मुक्त
पलासी बस पड़ाव लाखों की लागत से बना है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण अतिक्रमण का शिकार हो गया है। दुकानदारों के कब्जे के चलते वाहनों का आना-जाना बंद हो गया है, जिससे रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है। यात्रियों को सड़क के किनारे खड़े होकर बस का इंतज़ार करना पड़ता है।
पलासी (ए.सं.)। लाखों की लागत से बना पलासी बस पड़ाव आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन दिनों अतिक्रमण का शिकार हो गया है। बस पड़ाव के प्रवेश व निकास द्वार पर दुकानदारों का कब्जा होने से वाहनों का बस स्टैंड के भीतर आना जाना बंद हो गया है, जिस कारण वाहन सड़क के किनारे लगती है। इससे आये दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। हालांकि जाम को लेकर अक्सर छोटी-मोटी घटनाएं घटती रहती है। बस पड़ाव को खाली कराने की आवाज अक्सर उठती रहती है लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण बस पड़ाव अतिक्रमण का शिकार होकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार पलासी बस पड़ाव का निर्माण 1990 के करीब दिवंगत सिकटी विधायक रामेश्वर यादव के कार्यकाल में बना था। बस पड़ाव की भूमि को आगे से बाउंड्री भी की गई थी। बस पड़ाव में ईंट सोलिंग भी की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे यह बस पड़ाव अतिक्रमणकरियो की भेंट चढ़ गयी। बस स्टैंड के आगे अंदर तक दुकानदारों ने होटल, चाय-पान दुकानदारों व अन्य दुकानदारों द्वारा कब्जा जमा लिया है जिस कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गया है। इस कारण छोटी व बड़ी वाहनों को सड़क के किनारे लगना पड़ता है। इसको लेकर पलासी चौक पर अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है जबकि इस बस पड़ाव से प्रतिदिन हजारों की संख्यां में आसपास के दर्जनों गांव के लोगो का अररिया, पूर्णिया, किशनगंज की ओर जाना पड़ता है। इसके साथ ही गरीब मजदूर अपनी रोजी रोटी की तलाश में दिल्ली, मुम्बई, पंजाब व अन्य शहरों की ओर जाते हैं। बस पड़ाव के अभाव में सड़क के किनारे लगने वाले बस की प्रतीक्षा महिलाओं को खड़े होकर करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या कहते हैं ग्रामीण: शाद आलम, कमर आज़ाद, मखमूर हयात, बाबुल, मो. फारूक ने बताया कि बस पड़ाव को खाली कराने की मांग को लेकर अंचल कार्यालय में कई बार आवेदन दिया गया है लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नही हुई। बस पड़ाव के अभाव में यात्रियों को सड़क के किनारे खड़े होकर बस की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इस दौरान खास कर महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। क्या कहते हैं अंचलाधिकारी: अंचलाधिकारी सुशील कान्त सिंह ने बताया कि बस स्टैंड की भूमि की शीघ्र नपाई कर इस दिशा में आवश्यक करवाई की जाएगी।

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