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आम के पेड़ों में आई मंजरों की बहार, कीटों से बचाना जरूरी

आम के पेड़ों में आई मंजरों की बहार, कीटों से बचाना जरूरी

इस वर्ष भरगामा व आसपास के क्षेत्रों में आम की पेड़ों में मंजरो की बहार आ गयी है। मंजर को देख इस साल भी आम के बंपर फल आने की संभावना है। छोटे—बड़े सभी पेड़ों में पर्याप्त मंजर लगे हैं। जिन पेड़ों में गत वर्ष अधिक आम लगे थे, उनमें फिर से मंजरों की भरमार है। मगर इन मंजरों को बचाना किसानों के चिंता का विषय है। इसको लेकर किसान चिंतित हैं। हालांकि आम फले, इसके लिए उसकी समय पर देखभाल जरूरी है, क्योंकि कुछ दिन पूर्व हुई बारिश के बाद पछुआ हवा की लपटों ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। किसान मंजर बचाने के लिए कृषि के जानकारों की सलाह लेने में जुटे हैं। उनके अनुसार दवा का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि मधुआ रोग का प्रकोप कमोवेेश शुरू हो चुका है। मधुआ रोग भुगना नामक छोटा सिलेटी एवं गहरे रंग का फुदकने वाला कीट है। इसके छोटे बच्चे व वयस्क दोनों ही आम के मंजरों, नई शाखाओं और पत्तियों का रस चूसता है। परिणामत: मंजर सूख जाते हैं और फल भी सूखकर गिर जाता है।

मंजर बचाने के लिए करें मैथालियन कीटनाशी का प्रयोग: प्रभारी प्रखंड कृषि अधिकारी राजेन्द्र मिश्र ने बताया कि मंजर बचाने के लिए मैथालियन कीटनाशी का किसान प्रयोग करें। इससे पेड़ में छिपे कीट और मधुआ कीट मर जाते हैं। बताया कि ऐसे पेड़ जिसमें मंछर का आकार सरसों के दाना के बराबर हो गया है, तो उसमें फफूंदनाशी का छिड़काव जरूरी है। इसके प्रयोग से मंजर में लगने वाले एंप्रेक्स नोज रोग से बचाव होता है। उन्होंने बताया जब मंजर का आकार मटर के बराबर हो जाये तो प्लानोफिक्स नामक फफंूदनाशक का छिड़काव करना चाहिए। इधर कृषि विशेषज्ञ राजकिशोर ने बताया कि दवा की मात्रा की कमी या अधिकता से भी मंजर को नुकसान होता है। इसलिए मात्रा के अनुसार दवा का छिड़काव करना चाहिए।

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  • Web Title:Mango trees need to be protected from insect pests