मखाना बोर्ड स्थापना के शुभारंभ से किसानों में खुशी, बहुरेंगे दिन
अररिया जिले में मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का शुभारंभ किया गया है। इससे करीब 2468 हेक्टेयर में खेती कर रहे किसानों को फायदा होगा। पीएम मोदी द्वारा घोषित इस बोर्ड से मखाना की उपज...

अररिया जिले में करीब 2468 हेक्टेयर में होती है मखाना की खेती अररिया, निज प्रतिनिधि पूर्णिया में मखाना बोर्ड के शुभारंभ से अररिया जिला के मखाना उत्पादक किसानों में खुशी है। मखाना उत्पादक किसानों का कहना कि इससे अररिया समेत सीमांचल के जिलों में मखाना उत्पादक किसानों के दिन बहुरेंगे। अकेले अररिया जिले में करीब 2468 हेक्टेयर में मखाना की खेती होती है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब पांच हजार से अधिक किसान फिलहाल मखाना उत्पादन से जुड़े हैं। अब इन किसानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। फिलहाल सरकारी प्रयासों के बावजूद जिले में मखाना उत्पादकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
किसान के पुराने तकनीको के इस्तेमाल के चलते उपज कम होती है। कटाई और प्रसंस्करण में मशीनों की कमी से लागत बढ़ जाती है। किसानों को उचित दाम नहीं मिल पाता है और भंडारण की सही सुविधा नहीं रहने के चलते मखाना की गुणवत्ता कमजोर हो जाता है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी मिल पाती है। लेकिन अब ऐसे किसानों को काफी फायदा होगा। अररिया के अकरम, मो. जाहिद, फारबिसगंज के धर्मवीर गुप्ता, जोकीहाट के मो. निसार, शशि कुमार, राहुल कुमार, रानीगंज के प्रधान बेसरा आदि के मुताबिक, इसी साल केन्द्रीय बजट में मखाना बोर्ड की स्थापना के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने मखाना बोर्ड का शुभारंभ किया। इससे न सिर्फ उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि मखाना की खेती से जुड़े हजारों किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा। बताया जाता है कि सूबे में करीब 80 फीसदी मखाना का उत्पादन सीमांचल के जिलों में होता है। पीएम खुद इसे सुपर फूड करार दे चुके हैं। यहां के किसान लंबे समय सेे बेहतर मार्केटिंग और उचित मूल्य की मांग के साथ मखाना उत्पादन, विपणन और उद्योग को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे थे। मखाना बोर्ड की स्थापना से मखाना के उपज और गुणवत्ता में सुधार के लिए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। इलाके में उच्च उत्पादकता वाली मखाना के भेरायटी को विकसित करने में मदद मिलेगा। ऐसे तो मौजूदा समय में भी सीमांचल के मखाना की मांग काफी है मगर बोर्ड की स्थापना से किसानों को और बेहतर मूल्य और बाजार मिलेगा। पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को मखाना बीज, उर्वरक और मशीनरी पर सब्सिडी के साथ सर्वोतम कृषि पद्धति सीखने का मौका मिलेगा। पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को कृषि ऋण दिलाने में मदद, भंडारण और प्रसंस्करण की सुविधा के साथ उचित मूल्य निर्धारण को बल मिलेगा। वैश्विक बाजारों में सीमांचल के मखाना की पहुंच तो बढ़ेगी ही किसानों और निर्यातकों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे। बोर्ड की सहायता से किसान सीधे बाजार से जुड़ सकेंगे और बिचौलियों की भूमिका कम होगी। किसानों को उत्पाद का सही मूल्य मिलेगा। जिला उद्यान पदाधिकारी अभिजीत कुमार ने बताया कि इससे मखाना की खेती का और अधिक विस्तार होगा। बिहार के जीडीपी बढ़ाने में मखाना अहम भूमिका निभाएगा। दूसरे प्रदेशों में निर्यात बढ़ेगी। मखाना उत्पादक किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा। चूंकि मखाना उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी अधिक होती है लिहाजा महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
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