बहुचर्चित पत्रकार हत्याकांड मामले में दो आरोपितों को आजीवन कारावास

Feb 27, 2026 01:16 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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अररिया में पत्रकार विमल कुमार हत्याकांड के मामले में न्यायालय ने दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपितों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। घटना 18 अगस्त 2023 को हुई थी, जब आरोपियों ने शाजिश के तहत विमल कुमार को गोली मारी थी।

बहुचर्चित पत्रकार  हत्याकांड मामले में दो आरोपितों को आजीवन कारावास

अररिया, विधि संवाददाता। स्पीडी ट्रायल के तहत लगभग ढाई वर्ष पुराना पत्रकार विमल कुमार हत्याकांड मामला प्रमाणित होने पर न्यायमंडल अररिया के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ (एडीजे -04) रबी कुमार ने दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा के अलावा विभिन्न धाराओं में 50- 50हजार रुपया जुर्माना लगाया गया है। यह सजा एसटी 230/2024 में दिया गया है। सजा पाने वाला जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र के कोशकापुर उत्तर के रहने वाले 23 वर्षीय माधव कुमार यादव उर्फ लाट साहब पिता उमेश कुमार यादव तथा मनुल्लहपट्टी वार्ड 02 स्थित भरना निवासी 30 वर्षीय बिपिन यादव पिता श्रीलाल यादव शामिल हैं।

इसमें माधव मंडल को अलग से आर्म्स एक्ट में सजा के अलावा 10 हजार रुपया का जुर्माना लगाया गया है। जबकि शैशव कुमार, उमेश यादव, क्रांति कुमार यादव, संतोष कुमार भारती उर्फ संतोष राम, रूपेश यादव, आशीष कुमार याद व अर्जुन कुमार को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया है। सरकार की ओर से एपीपी प्रभा कुमारी मंडल ने बताया कि घटना 18 अगस्त 2023 की सुबह 05 बजे आरोपी गण षडयंत्र करके सूचक हरेंद्र प्रसाद सिंह के घर पर उसके पुत्र विमल कुमार (पत्रकार) को आवाज देकर घर का दरवाजा खुलवाया तथा दरवाजा खुलते ही गोली मार दिया था। विमल कुमार का इलाज के दौरान रानीगंज अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक पत्रकार विमल कुमार के पिता हरेंद्र प्रसाद सिंह के द्वारा रानीगंज थाना में कांड संख्या 338/2023 दर्ज कराई थी। इस मामले में केस आईओ ने 18 दिसंबर 2023 को कोर्ट में आरोप पत्र समर्पित किया था। जबकि न्यायालय के न्यायाधीश ने 19 दिसंबर 2023 को सभी 09 आरोपियों के विरुद्ध संज्ञान लिया गया था। 08 मई 2024 को आरोप गठन किया गया। आरोप गठन के बिंदु पर आरोपियों ने अपने आप को निर्दोष बताया था। इसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। 13 सितंबर 2024 को अभियोजन साक्ष्य प्रारंभ किया गया। जहां सभी साक्षियों ने घटना का पूर्ण समर्थन किया। साक्षियों के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायाधीश रबी कुमार ने आरोपितों को दोषी करार दिया। सजा के बिंदु पर सरकार की ओर से एपीपी प्रभा कुमारी मंडल ने आरोपितों को फांसी देने की अपील की, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमर कुमार, महेश चौपाल, शशि प्रकाश, मनोहर मिश्रा ने अपना पक्ष रखा था।

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