
जननी बाल सुरक्षा योजना के प्रति गरीबों का बढ़ा काफी विश्वास
कुर्साकांटा में सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। पिछले तीन वर्षों में 7950 महिलाओं ने स्वास्थ्य केन्द्रों पर बच्चे को जन्म दिया। जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत प्रोत्साहन राशि और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।
कुर्साकांटा, निज प्रतिनिधि एक जवाना था जब महिलाएं घर या निजी क्लीनिक में हीं बच्चों को जन्म देती थी। लेकिन बदलते समय के साथ बदलती सोच ने महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य केन्द्र में जन्म लेने वाले बच्चे व उनकी मां को खतरा नहीं के बराबर रहता है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं के बीच संस्थागत प्रसव को बढ़वा देकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम हुआ है। लोगों में सरकारी और सुदृढ़ स्वास्थ्य सुविधिाओं के प्रति व्याप्त नकारात्मकता को मात मिली और हर तबके के लोगों का संस्थागत प्रसव पर विश्वास बढ़ा है।
आंकड़े पर गौर करें तो पीएचसी सहित सात स्वास्थ्य केन्द्रों पर पिछले तीन वर्षो में 7950 महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया है। हालांकि अभी भी पांच प्रतिशत महिलाएं घर में ही बच्चों को जन्म दे रही है। प्रोत्साहन राशि- बीसीएम संदीप कुमार मंडल व बीएमएनई मो सुफियान ने बताया कि पहले की अपेक्षा स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या में दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। पिछले तीन वर्षो पीएचसी सहित सात स्वास्थ्य केन्द्रों पर 7950 महिलाअें ने बच्चे को जन्म दिया है। इसका एक कारण राज्य सरकार द्वारा जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी है। उन्होंने बताया कि प्रोत्साहन राशि के रुप में प्रसव कराने आई महिला को 1400 रुपये व आशा को तीन सौ दिये जाते हैं। यही नहीं पीएचसी में समय पूर्व जन्म लेने व तापक्रम की जरुरत वाले बच्चे के लिए न्यू बार्न बेबी केयर जैसे उपकरण उपलब्ध रहने के कारण इसका लाभ बच्चे को भी मिल रहा है। इसके साथ ही स्वस्थ्य केन्द्रों में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं को बेबी केयर कीट भी दी जाती है। क्या कहती हैं पीएचसी में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाएं - चुन्नी देवी, रीता देवी, आशा देवी, रुकसाना बेगम, अफसाना प्रवीण, मीरा देवी आदि ने बताया कि सरकार द्वारा चलायी जा रही जननी बाल सुरक्षा योजना गरीबों के लिए के लिए सुविधाजनक व सुरक्षात्मक हो गया है। इस कारण स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है। हालांकि इनलोगों ने स्वीकारा कि आज भी कुछ महिलाएं घर में ही बच्चे को जन्म देना मुनासीब समझती है, जो उचित नहीं है। क्या कहती हैं महिला चिकित्सक- महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ खूशबू कुमारी ने बताया कि प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान आने वाली सभी प्रसूति महिलाओं को बेहतर से बेहत्तर स्वस्थ्य सुविधा मुहैया कराया जा रहा है। जच्चे और बच्चे को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसके लिए डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी सजग रहते हैं। बच्चे का जन्म निश्चित रुप से चिकित्सक व एएनएम की देख रेख में होनी चाहिए ताकि जन्म के समय या जन्म के बाद जच्चा व बच्चा में होने वाले खतरे को दूर किया जा सके। इसके साथ हीं बच्चों के जन्म में कम से कम 3 वर्ष का अंतर हो। सबसे महत्वपूर्ण बात शिशु को शुरुआती 6 महीनों में मां का हीं दूध दें। उन्होंने लोगों खासकर महिलाओं से संस्थागत प्रसव कराने की अपील की है। सुझाव- गर्भवस्था के समय होने वाले समस्यओं से बचने के लिए महिलाओं को नियमित्त रुप से चिकित्सक से दिखाना चाहिए। ताकि जच्चा व बच्चा में होने वाली खतरा से रोका जा सके।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




