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23 नवंबर, 2020|3:16|IST

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सरकारी अस्पतालों के प्रति प्रसव पीड़ित महिलाओं का बढ़ा विश्वास

सरकारी अस्पतालों के प्रति प्रसव पीड़ित महिलाओं का बढ़ा विश्वास

एक जमाना था जब गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए अस्पताल आने से कतराती थी। गर्भवती महिला अपने बच्चों को अस्पताल की बजाय घर में ही जन्म देना बेहतर समझती थी। लेकिन बदलते परिवेश व सरकारी अस्पताल में सुविधाओं के कारण अब महिलाएं अस्पताल की ओर रुख कर रही है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य केन्द्र में प्रशिक्षित एएनएम, आशा कार्यकर्ता व ममता की देखरेख में ही गर्भवती महिलाएं प्रसव कराना बेहतर समझती है। स्वास्थ्य केन्द्र में बेहतर सुविधाओं के कारण महिलाओं का रुझान स्वास्थ्य केन्द्र की ओर बढ़ रहा है और वे अस्पताल भी पहुंच रही है। महिलाएं अपने बच्चों को लेकर काफी सतर्क रहती है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2017—18 में 3021, 2018—19 में 3335, 2019—20 में 2020—21 में जनवरी से लेकर अक्टूबर तक कुल 2388 महिलाओं का प्रसव हुआ है। अप्रैल 2020 में 246, मई में 236, जून में 191, जुलाई 20 में 239, अगस्त में 332, सितंबर में 463 व अक्टूबर 2020 में 574 महिलाओं का प्रसव हुआ।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी: पीएचसी के स्वास्थ्य मैनेजर मिथिलेश कु मार व बीसीएम वसीम रेजा ने बताया कि अस्पताल में प्रसव कराने वालों की तादात बढ़ती जा रही है। अब गर्भवती महिलाएं सुरक्षित प्रसव को लेकर सजग है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा संचालित जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि व सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित प्रसव होने से माहिलाओं की भीड़ स्वास्थ्य केन्द्र में बढ़ी है। बताया कि गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन भत्ता के रूप में 1400 रूपये भी मिलता है तथा आशा कार्यकर्ताओं को 600 रुपये है। इस कारण पीएचसी में प्रसव के लिये महिलाओं की भीड़ लगी रहती है।

क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सक: प्रभारी चिकित्सक जहांगीर आलम ने बताया कि अस्पताल में प्रशिक्षित, नर्स, एएनएम, ममता व आशा की देखरेख में गर्भवती महिलाएं अपने बच्चों को जन्म देती है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर ईलाज के लिये बाहर भी भेजा जाता है। श्री आलम ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को घर से लाने व ले जाने के लिए एम्बुलेंस सेवा भी दी जा रही है। बताया कि पहले गर्भवती महिलायें घर पर ही अपने बच्चों को जन्म देती थी, लेकिन कॉम्प्लीकेशन के कारण बच्चे की मृत्यु हो जाती थी। अब अस्पताल में ट्रेंड एएनएम, ममता व नर्स की मौजूदगी में महिलाएं अपने बच्चों को जन्म देना बेहतर समझती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की उचित देखभाल की जाती है। फ्री में तीनों टाइम भोजन, आवश्यक मेडिसीन भी पीएचसी में मुहैया करायी जाती है। साथ ही गर्भवती महिलाओं के खाते में भी 1400 रुपये शीघ्र भेज दी जाती है। इस कारण गर्भवती महिलाओं का रुझान पीएचसी की ओर बढ़ रही है।

क्या कहती है महिलाएं: अस्पताल में प्रसव कराने आई श्यामपुर गांव की महिला साजन, नूरसबा, सहरातून, मियांपुर की जुलेखा, महजबी आदि ने बताया कि पीएचसी में अपने बच्चों को जन्म देना सुरक्षित समझती है। अस्पताल में प्रशिक्षित नर्स, एएनएम व ममता रहती हैं। उन लोगों ने बताया कि यही पर किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। उनलोगों ने बताया कि यहां बेहतर सुविधा मिलती है।

आंकड़ा:

वर्ष - प्रसव की संख्या

2017—18 3021

2018—19 3335

2019—20 3623

अप्रैल से अक्टूबर 2020- 2388

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  • Web Title:Increased confidence of women suffering delivery against government hospitals