
भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला: नरेंद्र शर्मा
फारबिसगंज के वार्ड संख्या 17 में रामप्रकाश प्रसाद के आवास पर आठ दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर कलश शोभायात्रा निकाली गई। कथावाचक आचार्य श्री नारायण शर्मा ने कथा के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि भागवत कथा जीवन जीने की कला है। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का आनंद लिया।
फारबिसगंज, एक संवाददाता। फारबिसगंज के वार्ड संख्या 17, जानकी सदन स्थित समाजसेवी सह कारोबारी रामप्रकाश प्रसाद के आवासीय परिसर में आठ दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ रविवार से प्रारंभ किया गया। इस मौके पर श्रीमद भागवत कथा को लेकर शहर में कलश शोभायात्रा निकाली गई। कलश शोभायात्रा स्थानीय अस्पताल रोड़ स्थित आचार्य व कथावाचक पंड़ित नरेंद्र शर्मा के आवसीय परिसर से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण के उपरांत कथास्थल पहुंच कर समाप्त हुई।ढोल-नगाड़ों और 'जय श्रीराम', 'राधे-राधे' के गगनभेदी जयकारों के बीच शोभायात्रा में शामिल महिलाएं नाचती-गाति रही। जिससे माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। इधर भागवत कथा के पहले दिन व्यासपीठ पर बैठे कथावाचक आचार्य श्री नारायण शर्मा ने श्रीमद भागवत कथा के माहात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि घोर कलयुग में यदि कोई जीव भवसागर से पार हो सकता है, तो वह केवल श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। जहां भक्ति का वास होता है, वहां ज्ञान और वैराग्य स्वत: प्रकट हो जाते हैं। प्रथम दिवस की कथा में शौनकादि ऋषियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों तथा राजा परीक्षित की जिज्ञासाओं का सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया गया। भीष्म पितामह की स्तुति के प्रसंग ने पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। अनेक श्रद्धालुओं की आँखें कथा सुनते हुए नम हो गईं। आचार्य श्री शर्मा ने भगवान के वराह अवतार और हिरण्याक्ष वध की कथा सुनाते हुए कहा कि 'जब-जब धरती पर धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर सृष्टि की रक्षा करते हैं। कथा के समापन पर चतुश्लोकी भागवत की गूढ़ व्याख्या करते हुए बताया गया कि परमात्मा सृष्टि के कण-कण में व्याप्त हैं और वही इस जगत के आदि, मध्य और अंत हैं। इस अवसर पर यजमान रामप्रकाश प्रसाद ने सपरिवार व्यासपीठ एवं श्रीमद्भागवत पोथी का विधिवत पूजन कर क्षेत्र की सुख-शांति,समृद्धि और कल्याण की कामना की। कथा के दौरान प्रस्तुत भगवान वराह अवतार की सजीव झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। इस मौके पर आयोजनकर्ता राम प्रकाश प्रसाद,धैर्य आनंद,मनीष दास,वर्णिका दास,सुनीता लड्ढा, अमरजीत कुमार,विजय प्रकाश, मनीषा प्रकाश, विजय कुमार, गणेश दास,अरविंद दास,दिनेश दास, पियूष कुमार,मोतीलाल शर्मा,आनंद प्रकाश, मनोज दास,अनमोल कुमार,अमृत कुमार,कर्नल दास,शिव फिटकरीवाला,गौरव मरोठी,पूनम पांडिया,मनोज गोयल,ह्रदय भगत,धनश्याम अग्रवाल,विजय लखोटिया, राजीव रमण भास्कर,अलका अग्रवाल, सुनीता गोयल, शिवानी दास,प्रीति प्रभा,प्रभा प्रसाद,आरती देवी,मीनू कुमारी,निशा देवी,बेबी कुमारी,पूजा कुमारी,गीता देवी,नूतन दास,कुमुद शर्मा, कुसुम शर्मा,प्रभा सेठिया,लक्ष्मी गौतम, स्नेहलता गौतम,दीपा अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद थे।

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