पर्यावरण संरक्षण अभियान को ठेंगा दिखा रहे प्लास्टिक व थर्माकोल के कारोबारी

Feb 12, 2026 11:33 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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फारबिसगंज में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत प्लास्टिक और थर्माकोल पर प्रतिबंध के बावजूद, इनका अवैध कारोबार जारी है। प्रशासन की कार्रवाई प्रभावी नहीं हो रही है, और बाजारों में यह उत्पाद धड़ल्ले से बिक रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सख्त कदम उठाए जाएंगे।

पर्यावरण संरक्षण अभियान को ठेंगा दिखा रहे प्लास्टिक व थर्माकोल के कारोबारी

फारबिसगंज, निज संवाददाता। जहां सरकार पर्यावरण नियंत्रण की दिशा में एक से एक सकारात्मक कदम उठा रही है वहीं स्थानीय शहर में प्रतिबंधित प्लास्टिक और थर्माकोल का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। जानकार बताते हैं कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत बिहार सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल उत्पादों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद शहर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। प्रशासन की छिटपुट कार्रवाई इस पर्यावरण विरोधी गोरखधंधे पर प्रभावी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद व डॉफिन मेन सुदन सहाय कहते हैं कि थर्माकोल और सिंगल यूज प्लास्टिक न तो जल्द नष्ट होते हैं और न ही पर्यावरण के अनुकूल हैं।

इनके कारण मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है। खुले में जलाने पर इससे जहरीली गैस निकलती है, जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए बेहद घातक है। सरकार ने प्लेट, गिलास, सजावटी सामग्री, प्लास्टिक चम्मच और पतले कैरी बैग जैसे उत्पादों पर रोक लगाई है, फिर भी बाजारों में इनकी खुलेआम बिक्री हो रही है। फारबिसगंज में तो इस कारोबार का बाढ़ सा आ गया है। कार्रवाई हुई, पर असर नहीं- फारबिसगंज नगर परिषद द्वारा समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं। 15 जनवरी 2025 को तीन दुकानों से छह क्विंटल प्लास्टिक और आठ पैकेट थर्माकोल जब्त कर 7,500 रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं 24 मई 2025 को करीब पांच लाख रुपये मूल्य के प्रतिबंधित सामान जब्त कर 31 हजार रुपये का जुर्माना वसूल गया। बावजूद इसके कारोबार दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। कारण यह सिर्फ दिखावे की करवाई थी जो ऊंट के मुंह में जीरा के फौरन का सामान था। क्या कहते हैं अधिकारी- नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी रणधीर लाल कहते हैं कि परीक्षा के कारण अभियान फिलहाल रुका है, लेकिन जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा समाप्ति के बाद एक सशक्त टीम बनाकर प्रतिबंधित प्लास्टिक व थर्माकोल कारोबार के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा और प्रावधान तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। ग्रामीण बाजारों तक फैला है कारोबार - जानकार बताते हैं कि पर्यावरण विरोधी यह गोरख धंधा शहर से ग्रामीण बाजारों तक फैला हुआ है। और धड़ल्ले से इसकी बेरोकटोक बिक्री हो रही है । खासकर बथनाहा ,जोगबनी, कुर्साकाटा, घूरना, फुलकाहा, बसमतिया, नरपतगंज ,भरगामा,महथावा, सिमराहा जैसे ग्रामीण बाजारों में धड़ल्ले से प्रतिबंधित प्लास्टिक एवं थर्माकोल की बिक्री हो रही है और हर जगह प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। सवाल है कि क्या प्रशासन इस अवैध कारोबार पर सचमुच लगाम लगा पाएगी, या पर्यावरण यूं ही दम तोड़ता रहेगा?

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