Araria News: हंसराज बछावत की आंखों से दो जिंदगियों में फैलेगी रोशनी

हिन्दुस्तान, अररिया
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Araria News: हंसराज बछावत के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान करने का निर्णय लिया, जिससे दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिलेगी। तेरापंथ युवक परिषद ने इस प्रक्रिया का समन्वय किया। यह फारबिसगंज का 26वां नेत्रदान है, जो समाज में मानवता का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

Araria News: हंसराज बछावत की आंखों से दो जिंदगियों में फैलेगी रोशनी

Araria News: अनूठी मिसाल: हंसराज बछावत की आंखों से दो जिंदगियों में फैलेगी रोशनी शोक की घड़ी में परिवार ने लिया मानवता का बड़ा फैसला फारबिसगंज में हुआ 26वां नेत्रदान फारबिसगंज,एक संवाददाता। कहते हैं इंसान भले इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसके नेक कर्म हमेशा जीवित रहते हैं। फारबिसगंज के आरबी लेन निवासी हंसराज बछावत ने मरणोपरांत भी मानव सेवा की ऐसी मिसाल कायम की, जिससे दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में नई रोशनी पहुंचेगी। उनके निधन के बाद परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के सामने संवेदनशीलता, साहस और परोपकार का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया।

परिवार का साहसिक निर्णय

हंसराज बछावत के निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी राधादेवी बछावत, पुत्री दीपिका बैद एवं दामाद पंकज बैद ने शोक के बीच भी मानव सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नेत्रदान कराने की सहमति दी। इसकी सूचना तत्काल तेरापंथ युवक परिषद, फारबिसगंज को दी गई। सूचना मिलते ही परिषद के नेत्रदान प्रभारी आशीष गोलछा ने कटिहार की मेडिकल टीम से संपर्क कर पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया।

सफल प्रक्रिया

कटिहार मेडिकल कॉलेज की टीम के डॉ. अभय यादव, डॉ. समीक्षा एवं डॉ. इरा ने निर्धारित समय के भीतर सफलतापूर्वक कॉर्निया सुरक्षित किया। चिकित्सकों ने बताया कि इन कॉर्निया के प्रत्यारोपण से दो जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिल सकेगी। नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष पंकज नहाटा, श्रेयांश बैद, मुकेश राखेचा, दीपक समदरिया, संजय बैद, मनोज बछावत, अंकित झावक तथा दधीचि देहदान समिति के जिलाध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता अस्पताल में मौजूद रहे। सभी ने शोकाकुल परिवार को सांत्वना देते हुए उनके इस मानवीय निर्णय की सराहना की।

समाज में जागरूकता

दधीचि देहदान समिति के जिलाध्यक्ष अजातशत्रु अग्रवाल ने कहा, नेत्रदान सबसे बड़ा महादान है। अपनों को खोने के दु:ख के बीच ऐसा निर्णय लेना असाधारण साहस की बात है। बछावत परिवार ने समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि मृत्यु के बाद भी किसी की आंखें दो लोगों की दुनिया रोशन कर दें, तो इससे बड़ा मानव धर्म कोई नहीं हो सकता। तेरापंथ युवक परिषद एवं दधीचि देहदान समिति द्वारा लगातार चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान का सकारात्मक असर अब शहर में दिखाई देने लगा है। हंसराज बछावत का नेत्रदान फारबिसगंज का 26 वां नेत्रदान है। इस पुनीत कार्य की शहरभर में सराहना हो रही है और लोग इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल मान रहे हैं। फारबिसगंज फोटो संख्या 21: फारबिसगंज में नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान कटिहार मेडिकल टीम एवं दिवंगत हंसराज बछावत के परिजन।

सामान्य प्रश्न

हंसराज बछावत ने नेत्रदान क्यों किया?
हंसराज बछावत के परिवार ने मानव सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नेत्रदान कराने की सहमति दी।
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