हत्या मामले में दोस्त को मिली आजीवन कारावास की सजा
अररिया, विधि संवाददाता। स्पीडी ट्रायल में चाकू से गोद गोदकर हत्या करने का मामला
अररिया, विधि संवाददाता। स्पीडी ट्रायल में चाकू से गोद गोदकर हत्या करने का मामला प्रमाणित होने पर न्यायमंडल अररिया के एडीजे 01 रवि कुमार ने आरोपी दोस्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा के अलावा 50 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर युवक को एक वर्ष की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। यह सजा एसटी 100/2025 में सुनायी गयी है। सजा पाने वाला 28 वर्षीय आरोपी नजरूल हसन जोगबनी थाना क्षेत्र के टप्पू टोला पिपरा घाट निवासी मो हसीब का बेटा है।
जबकि मृतक मो आशिक नरपतगंज थाना क्षेत्र के स्वालदह मझुआ का रहने वाला था। इस संबंध एडीजे 04 में प्रतिनियुक्त एपीपी प्रभा कुमारी मंडल ने बताया कि घटना 18 जुलाई 2024 की शाम पांच बजे के बाद की है। बताया कि आरोपी नजरुल हसन का मो आशिक से दोस्ती थी। 18 जुलाई की शाम नजरुल हसन, मो आशिक व अन्य दोस्त एक साथ नरपतगंज के स्वालदह मझुआ हाट में समोसा व जिलेबी खा रहे थे। उस वक्त मो आशिक के भाई जहांगीर भी बाजार में ही सबकुछ देख रहा था। बताया कि नास्ते के बाद आरोपी नजरुल हसन ने मो आशिक को अपनी बाइक पर बिठाकर पूरब दिशा की ओर लेकर चला गया। कुछ देर बाद मो आशिक़ का मोबाइल बंद हो गया। देर शाम तक वह घर वापस नहीं लौटा। एपीपी प्रभा कुमारी मंडल ने बताया कि यह भी साक्ष्य मिला कि जब रात को मो आशिक वापस घर नहीं लौटा तो भाई मो जहांगीर अगले दिन सुबह पूछताछ करने नजरूल हसन के घर गया। लेकिन वहां उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे जहांगीर को अपने भाई मो आशिक की हत्या की आशंका हुई। क्योंकि आरोपी के पास जहांगीर के भाई मो आशिक का रुपया बकाया था। जिसे आरोपी लौटाना नहीं चाहता था। इसके बाद जहांगीर ने लिखित रूप से सारी जानकारी नरपतगंज थाना को दिया। इधर घटना के दूसरे दिन ही मो आशिक का शव हरिपुर गांव के नहर साइड धान के खेत में मिला। एपीपी प्रभा कुमारी मंडल ने बताया कि चिकित्सीय परीक्षण में यह खुलासा हुआ कि आरोपी व उसके सहयोगियों ने मिलकर मो आशिक के शरीर पर चाकू से कई बार प्रहार कर निर्मम हत्या की। छाती, पंजरा, जांघ तथा सिर पर चाकू से प्रहार के निशान भी मिले। मृतक मो आशिक के बड़े भाई व नरपतगंज स्वालदह मझुआ वार्ड 12 निवासी मो जहांगीर पिता मो वारिस ने आरोपी सहित अन्य सहयोगी व अज्ञात अपराधकर्मियों के विरुद्ध नरपतगंज थाना कांड संख्या 619/2024 के तहत 19 जुलाई 2024 को मामला दर्ज कराया था। इस मामले में केस आईओ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 28 अक्टूबर 2024 को कोर्ट में आरोपी नजरुल हसन के विरुद्ध आरोप पत्र समर्पित किया। जबकि अन्य सहयोगियों पर पूरक अनुसंधान जारी रखा। आरोप पत्र समर्पित होते हुए कोर्ट के न्यायाधीश ने 18 नवम्बर 2024 को आरोपी नजरुल हसन के विरुद्ध संज्ञान लिया। 27 मार्च 2025 को आरोप गठन के बिंदु पर आरोपी नजरुल हसन ने अपने आप को बेकसूर बताया। आरोपी के बेकसूर बताने पर कोर्ट में आरोपी नजरुल हसन के विरुद्ध ट्रायल शुरू करते हुए 23 अप्रैल 2024 से अभियोजन के द्वारा साक्ष्य प्रारंभ किया गया। जहां सभी साक्षियों ने घटना का पूर्ण समर्थन किया। साक्षियों के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार ने आरोपी नजरुल हसन को हत्या करने के मामले में दोषी पाया। सजा के बिंदु पर आरोपी नजरुल हसन के अधिवक्ता मो फैयाज आलम ने कम से कम सजा देने की गुहार लगाई। जबकि निर्मम हत्या करने के मामले में एपीपी प्रभा कुमारी मंडल ने आरोपी को फांसी की सजा देने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार ने आरोपी की सजा मुकर्रर की।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




