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23 सितम्बर, 2020|2:44|IST

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मांगों के समर्थन में हड़ताल पर गये किसान सलाहकार

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सरकार पर किसान सलाहकारों के साथ भेदभाव बरतने का आरोप लगाते हुए विभिन्न मांगों के समर्थन में जिलेभर के किसान सलाहकार 11 दिवसीय हड़ताल पर चले गये हैं। सोमवार को जिला कृषि कार्यालय परिसर में हड़ताली सलाहकारों ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। कहा कि पिछले दस साल से विभिन्न कृषि योजनाओं को मुस्तैदी के साथ धरातल पर उतारने का काम करते हैं। विभिन्न योजनाओं को सुदूर गांव के किसानों तक पहुंचाने के बाद भी विडंबना यह कि सरकार किसान सलाहकारों को कृषि कर्मचारी मानने तक से इंकार कर रही है। उनलोगों को सिर्फ प्रगतिशील किसान मान रही है। सरकार कहती है कि केएस को टैक्नीकल जानकारी नहीं है जबकि उनलोगों से टैक्नीकल काम लिया जाता है। किसान सलाहकारों के प्रति सरकार उदासीन रवैया अपना रही है। बताया कि पिछले दिनों संघ की ओर से सरकार को जो मांग पत्र सौंपा गया उसपर भी अमल नहीं हुआ। प्रदेश से जिला स्तर तक के अधिकारी उनलोगों को गलत तरीके से धमका रहे हैं। अधिकारियों के गलत रवैये के चलते दो किसान सलाहकारों की आकस्मिक मौत हो गयी। इधर किसान सलाहकारों के हड़ताल से कृषि योजनाओं के क्रियान्वयण पर असर पड़ा है। घर खेत पहुंचाने के लिए सर्वे कार्य ठप हो जाएगा। बताया कि किसान सलाहकारों के चलते ही सरकार को अवार्ड पर अवार्ड मिल रहा है। बताया कि प्रथम चरण में हड़ताल दस सितंबर तक चलेगा। इस बीच अगर मांगें नहीं मानी गयी तो संघ के निर्णयानुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। मौके पर मुरली मनोहर, शंभू कुमार समेत बड़ी संख्या में किसान सलाहकार थे।

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  • Web Title:Farmer advisors went on strike in support of demands