निजी विद्यालय संचालकों की मनमानी पर शिक्षा विभाग ने कसा शिकंजा

Apr 07, 2026 11:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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अररिया में शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब विद्यालय तीन साल तक यूनिफार्म और पुस्तक में बदलाव नहीं कर सकेंगे। अभिभावकों को किसी खास दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। आदेश की अवहेलना करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

निजी विद्यालय संचालकों की मनमानी पर शिक्षा विभाग ने कसा शिकंजा

अररिया, वरीय संवाददाता जिले के निजी विद्यालय संचालकों की मनमानी पर शिक्षा विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसके तहत तीन साल तक प्राइवेट स्कूल संचालक यूनिफार्म व पुस्तक में किसी तरह का परिवर्तन या बदलाव नहीं कर सकेंगे। किसी खास दुकान पर पठन-पाठन व अन्य सामग्री खरीदने के लिए वे अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकेंगे। प्रत्येक कक्षा के लिए अनिवार्य पुस्तकों की सूची एवं यूनिफार्म का विवरण वेबसाइट पर हर हाल में अपलोड करना होगा । विद्यालय परिसर के किसी सार्वजनिक स्थान पर चिपकाकर पूरी जानकारी देनी होगी। इस बावत शिक्षा विभाग ने आदेश भी जारी कर दिया है।

आदेश की अवहेलना करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है। मामले की पुष्टि डीईओ संजय कुमार ने की है। डीईओ श्री कुमार ने बताया कि विभिन्न समाचार पत्रों, अभिभावकों की शिकायतों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा अवगत कराया गया है कि अररिया जिले के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से शुल्क के साथ अन्य सामग्री की भी अधिक कीमत वसूली की जा रही है। इन निजी विद्यालयों के संचालकों द्वारा पुस्तकें, यूनिफॉर्म, बैग, जूते, कॉपियां आदि अत्यधिक महंगी कीमत पर बेची जा रही है तथा अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जिससे उन्हें खुले बाजार से सस्ती चीजें खरीदने की स्वतंत्रता नहीं मिल पाती है। इस एकाधिकारी प्रवृति के कारण विशेष रूप से गरीब वर्ग के बच्चों के अभिभावको पर अनुचित और भारी आर्थिक खर्च का बोझ पड़ रहा है। जिससे विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस तथ्य से भी अवगत कराया गया है कि निजी विद्यालय एवं स्टेशनरी/यूनिफॉर्म विक्रेता पुस्तकों का अत्याधिक मूल्य तय करते हैं, जिससे यह स्थिति पूर्णतया शोषणकारी बन गई है। डीईओ ने बताया कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 धारा-4(6) के तहत विद्यालय या विद्यालय द्वारा निर्धारित दुकान, स्थान से ड्रेस, पुस्तकों एवं अन्य सामग्रियों का क्रय करते की अनिवार्यता पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा विद्यालय से अथवा स्थान विशेष से सामग्री क्रय करने की बाध्यता रखने वाले विद्यालयों पर दण्डात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।इस आलोक में उन्होंने निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं। पहला कोई भी विद्यालय संचालक/प्राचार्य विद्यार्थियों को विद्यालय की यूनिफार्म, जूते, टाई, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियों अथवा अन्य स्टेशनरी सामग्री किसी एक ही दुकान या विक्रेता से क्रय करने के लिए बाध्य नहीं करेगा। दूसरा, सभी निजी विद्यालयों के संचालक यह सुनिश्चित करेंगे कि अपने विद्यालय में संचालित प्रत्येक कक्षा के लिए अनिवार्य पुस्तकों की सूची एवं यूनिफार्म का विवरण शिक्षण सत्र प्रारंभ होने के पूर्व विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए तथा विद्यालय परिसर के किसी सार्वजनिक स्थान पर चस्पा दिया जाए। तीसरा, विद्यालय प्रशासन द्वारा यूनिफार्म/पुस्तकों का निर्धारण इस प्रकार किया जाएगा कि उसमें कम से कम तीन वर्षों तक कोई परिवर्तन न हो। डीईओ ने बताया कि इस आदेश का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित व्यक्ति/संस्था/आयोजक के विरूद्ध बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 की धारा-7 के अंतर्गत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। विद्यालय द्वारा आदेशों की अवहेलना की स्थिति में विद्यालय के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक तथा बोर्ड ऑफ डायरेक्टरों के समस्त सदस्य उत्तरदायी माने जाएंगे। डीईओ ने बताया कि यदि किसी विद्यालय संचालक द्वारा उपर्युक्त आदेश का उल्लंघन करने की सूचना प्राप्त होती है तो इस आशय की सूचना जिला शिक्षा पदाधिकारी, अररिया के ई-मेल- के माध्यम से भेजना सुनिश्चित करें, ताकि संबंधित विद्यालय संचालक के विरूद्ध कार्रवाई की जा सके।

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