
सिमराहा बाजार में हर तरफ दिख रहा तबाही व बर्बादी का मंजर
फारबिसगंज के सिमराहा बाजार में भीषण आग लगने से लगभग 30 दुकाने जलकर राख हो गईं। दुकानदारों का भविष्य अंधकार में है और वे अपनी खोई हुई पूंजी की तलाश में हैं। इस घटना में 90 वर्षीय श्याम बिहारी की मौत ने परिजनों को और भी दुखी कर दिया है। दुकानदार मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
फारबिसगंज, निज संवाददाता। भीषण अग्निकांड के बाद सिमराहा बाजार इन दिनों बर्बादी व तबाही की कहानी बयां कर रहा है। जहां कल तक ग्राहकों की आवाजाही से रौनक रहती थी, वहां आज जले हुए खंभों, धुएं की गंध और राख में बदल चुके सपनों को समेटे खामोश पड़ा है। मंगलवार की अहले सुबह की आग ने देखते ही देखते बाज़ार की लगभग 30 दुकानों को खाक कर दिया। यह केवल दुकानों को ही खाक नहीं किया। उनके अरमान को भी राख में बदल दिया। तिनका-तिनका जोड़कर खड़ा किया गया कारोबार कुछ ही पलों में राख में तब्दील हो गयी। यही वजह है कि अगलगी के दूसरे दिन भी पीड़ित दुकानदार अपने जले हुए भविष्य की तलाश में राख को खंगालते दिखे।
कोई जले हुए खंभे हटाता नजर आया, तो कोई राख में सामान का कोई टुकड़ा ढूंढने की कोशिश करता दिखा। किताब, कपड़े, घरेलू सामान-सब कुछ जलकर कागज़ और कपड़ों के काले टुकड़ों में बदल गया। लोगों की आंखें उन जले अवशेषों को देखकर नम हो रही हैं। दुकानदारों की आवाज़ में दर्द साफ झलकता है। हर आने जाने वाले से कहते हैं कि आखिर हमारा कसूर क्या था? किस बात की इतनी बड़ी सजा मिली? पीड़ित व्यवसायी सुबोध मंडल, निलेश ठाकुर, जमीर हुसैन, संतोष मंडल, रूपेश श्रृंगार, जीवन व्यापारी, कार्पिन ठाकुर, मन्नू कुमार और रहमत सहित तमाम दुकानदार आज भी सदमे से उबर नहीं पाए हैं। अधिकांश ने दुकानें लोन लेकर शुरू की थीं, कई ने जमीन मालिकों को पगड़ी तक चुकाई थी। अब न दुकान बची है, न व्यवसाय करने को पूंजी। कर्ज की किस्तें चुकाना उनके लिए पहाड़ जैसा बोझ बन गया है। घटना के बाद जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर भरोसा तो दिलाया, लेकिन दुकानदारों की बड़ी चिंता यही है कि उनकी जिंदगी पटरी पर कब लौटेगी। प्रशासनिक स्तर पर अंचल पदाधिकारी पंकज कुमार ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। लगभग 25-30 प्रभावित दुकानदारों ने लिखित आवेदन देकर मुआवजा की मांग की है। अनुमानित नुकसान डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास बताया जा रहा है, हालांकि यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लेकिन इस बात की खूब चर्चा है कि अगर समय रहते फायर ब्रिगेड नहीं पहुंचती, तो नुकसान और बड़ा हो सकता था। फिलहाल बाजार सुनसान है-जहां कल तक बच्चों की किलकारियां और खरीदारों की भीड़ होती थी, वहां आज सिर्फ राख और खामोशी फैली है। दुकानदार टूटे मन से मलबा हटाते हुए अपने बिखरे भविष्य को जोड़ने का संघर्ष जारी रखे हुए हैं। बुजुर्ग श्याम बिहारी की मौत से सदमे में परिजन: इस अगलगी की घटना में 90 वर्षीय बुजुर्ग श्याम बिहारी की हुई मौत को लेकर परिजन अभी तक सदमे में है। लोगों का कहना है श्याम बिहारी बहुत नेक दिल इंसान थे । उनका व्यवहार के सब कायल थे । अपने बेटे की दुकान की हिफाजत के लिए रात में रूक जाया करते थे। दुकान तो जल गई मगर पिता को खोने का अफसोस बेटे को ता उम्र रहेगा । बेशक जिनकी भी दुकाने जली है उन्हें दुकान को संभालने ,हालत को पटरी पर लौटाने और खोई हुई पूंजी की चिंता में मगन है मगर एक पीड़ित दुकानदार प्रदीप गुप्ता ऐसा भी है जिन्हें दुकान को खोने से ज्यादा गम पिता को खोने का हो रहा है। फिलहाल पीड़ितों की बस एक ही चिंता कि आखिर कब उन लोगों की जिंदगी पटरी पर लौटेगी...।

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