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गंदगी व प्रदूषित पानी से चिरवाहा रेहिका टोला में पांच बच्चों की गयी थी जान

गंदगी व प्रदूषित पानी से चिरवाहा रेहिका टोला में पांच बच्चों की गयी थी जान

संक्षेप:

इन्दौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत ने रानीगंज के चिरवाहा महादलित रेहिका टोला में डेढ़ साल पहले पांच बच्चों की मौत की याद ताजा कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में प्रदूषित जल को मौत का कारण बताया गया था। हालाँकि, गांव में पानी की आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।

Jan 03, 2026 01:02 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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रानीगंज। एक संवाददाता। इन्दौर में दूषित पानी की वजह से कई लोगों की मौत की खबर ने डेढ़ साल पूर्व अररिया के रानीगंज स्थित चिरवाहा महादलित रेहिका टोला में पांच मासूमों की मौत की यादें ताजी कर दी है। रानीगंज प्रखंड के मझुवा पूरब पंचायत के वार्ड संख्या 11 के चिरवाहा महादलित रेहिका टोला में डेढ़ वर्ष पहले पांच बच्चों की मौत हुई थी। प्रदूषित पानी पीने से इन बच्चों की मौत होने का मामला सुर्खियों में आने के बाद सितंबर 2024 में स्वास्थ्य विभाग पटना की टीम गांव पहुंची थी। मृतक बच्चों की उम्र पांच साल के थे। उस समय चिरवाहा महादलित रेहिका टोला जांच करने पहुंचे बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति के सर्वेक्षण पदाधिकारी रंजीत कुमार ने बताया था कि बच्चों की मौत के कारणों में एक गंदगी व प्रदूषित जल भी है।

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ग्रामीणों ने बताया कि जांच में दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत की बात सामने आयी थी। जबकि दस साल पहले इसी गांव में एक दर्जन बच्चों की मौत हुई थी। उसका भी कारण प्रदूषित जल पीना बताया गया था। बच्चों की मौत के बाद आनन-फानन में विभाग ने पानी की टंकी व नल की टोटी लगाया गया था। लेकिन ग्रामीणों की माने तो एक महीने के बाद ही पीएचडी के द्वारा लगाया गया नल से पानी निकलना बंद हो गया। मझुवा पूरब पंचायत के उप मुखिया धर्मेन्द्र कुमार, ग्रामीण चुन्नू ऋषिदेव, कमली देवी, झागों ऋषिदेव आदि ने बताया की गांव में लगी पानी की टंकी हाथी का दांत साबित हो रहा है। डेढ़ साल पहले प्राथमिक विद्यालय चिरवाहा के समीप व गांव के कुछ घरों में नल लगाया गया था, लेकिन एक महीने के बाद ही नल से पानी निकलना बंद हो गया। एक महीने तक यहां के लोगों को टंकी का शुद्ध पानी भी मिला लेकिन एक महीने के बाद से ही पानी मिलना बंद हो गया। सबसे हैरत की बात यह है कि जब दस साल पहले ही जांच में दूषित पानी पीने से इस गांव के लोगों के बच्चों की मौत की बात सामने आयी थी तब भी गांव के अधिकांश घरों में नलजल योजना की टोटी नहीं लगाया गया है। वर्तमान समय में ही गांव के आधे घरों में ही नलजल का टोटी लगाया गया है। उसमें में नियमित तौर पर पानी नहीं आता है। ग्रामीणों का कहना है कि नलजल के टंकी के ऑपरेटर को वेतन नहीं मिलने से पानी की सही से सप्लाई नहीं हो रहा है। इधर पीएचईडी के कार्यपालक पदाधिकारी अभय कुमार ने बताया कि जल्द ही गांव में पीएचईडी की टीम जाकर नलजल के साथ साथ टंकी को दुरुस्त करेगा। लोगों को शुद्ध पानी मिलने लगेगा।