गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा से वंचित हैं कई महादलित टोले के बच्चे
रानीगंज प्रखंड क्षेत्र के महादलित टोले में बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब है और छात्रवृत्ति एवं अन्य योजनाओं की राशि में गबन की खबरें आम हैं। कई बच्चे बरसात में स्कूल नहीं जा पाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके माता-पिता मजदूरी करते हैं और शिक्षा का महत्व नहीं समझते।

रानीगंज। एक संवाददाता। रानीगंज प्रखंड क्षेत्र में कई ऐसे महादलित टोले हैं जहां के बच्चे शिक्षा से वंचित है। इन महादलित टोले के बच्चे पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते है। राज्य व केंद्र सरकार सर्व शिक्षा अभियान के तहत लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा क्या है यह किसी से अछूता नहीं है। कई विद्यालयों में छात्रवृत्ति, पोशाक, समग्र विकास अनुदान आदि योजनाओं की राशि की गबन की खबरें आये दिन आती रहती है। सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा का यह आलम है कि उच्च व मध्यम वर्ग के 80 प्रतिशत से अधिक लोगों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते है।
जबकि सरकारी विद्यालयों में 80 प्रतिशत से अधिक गरीबो के बच्चे ही पढ़ने आते है। इन सबके बीच रानीगंज के बसेटी और धोबनिया पंचायत के सीमा पर स्तिथ जामुन ऋषिदेव टोला में सैकड़ो ऐसे बच्चे हैं जो पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते है। बिशनपुर पंचायत के वार्ड छह स्थि महादलित टोले में स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र नहीं रहने से इस गांव के लगभग बच्चे पढ़ाई से वंचित है। बरसात के समय नदी में पानी रहने तीन चार महीनों तक एक भी दिन बच्चे स्कूल नहीं जाते है। इनके आलावे क्षेत्र के पश्चिमी भाग में नहर किनारे बसे महादलित टोले के बच्चे न के बराबर स्कूल जाते है। ग्रामीणों का कहना है इन बच्चों के ज्यादातर अविभावक दिल्ली पंजाब व अन्य जगहों में मजदूरी करते है। कई पीढ़ी तक पढ़ाई का वास्ता नहीं होने से शिक्षा का महत्व नहीं जान सके है। सरकारी विद्यालय के एक शिक्षक ने बताया कि महादलित टोले के ज्यादातर बच्चे एमडीएम के बाद घर चले जाते है। जबकि इन बच्चों को शिक्षित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। इधर उप प्रमुख कलानंद सिंह ने बताया की आगामी पंचायत समिति की बैठक में इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से बात किया जायेगा। ग्रामीण स्तर पर जागरूक करने की जरूरत है। वहीं रानीगंज बीईओ नरेश कुमार ने बताया कि जिन विद्यालयों को टैग किया गया है। उन जगहों की जांच की जायेगी। शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जायेगा।

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