
साहित्यकारों ने दोनों की जीवनी पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला
फारबिसगंज में मंगलवार को इंद्रधनुष साहित्य परिषद ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की पुण्यतिथि और साहित्यकार भोला पंडित प्रणयी का जन्मोत्सव मनाया। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों ने हरिश्चंद्र की तस्वीर पर श्रद्धा अर्पित की और प्रणयी जी के कार्यों पर चर्चा की। उन्हें बिहार सरकार द्वारा नागार्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
फारबिसगंज, एक संवाददाता। स्थानीय प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पीडब्ल्यूडी के प्रांगण में इंद्रधनुष साहित्य परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेंदु हरिश्चंद्र की पुण्यतिथि और अररिया जिला के वयोवृद्ध साहित्यकार भोला पंडित प्रणयी का जन्मोत्सव एक साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदीसेवी सह द्विजदेनी क्लब के उपाध्यक्ष अरविन्द ठाकुर ने की। इस अवसर पर सर्वप्रथम उपस्थित साहित्यप्रेमियों के द्वारा भारतेंदु हरिश्चंद्र की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पण किया गया। उसके बाद परिषद के संस्थापक सचिव विनोद कुमार तिवारी ने प्रणयी जी के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उनका जन्म 6 जनवरी 1936 ई. को अररिया के पास गीतवास में हुआ था।
अररिया जिला से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका संवदिया के वे संस्थापक संपादक हैं। उनकी दर्जनों पुस्तक प्रकाशित है। बिहार सरकार द्वारा उन्हें नागार्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। श्री तिवारी ने बताया कि अररिया के सुभाष स्टेडियम और खडगेश्वरी काली मंदिर की तरह संवदिया पत्रिका भी अररिया जिला का धरोहर है। रेणु जी की चर्चित कहानी पर संवदिया नाम रखकर प्रणयी जी ने उन्हें स्थायी श्रद्धांजलि दी है। तदुपरांत कार्यक्रम के अध्यक्ष अरविन्द ठाकुर ने महान कवि और नाटककार भारतेंदु हरिश्चंद्र के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाते हैं। वे हिन्दी में आधुनिकता के पहले रचनाकार थे। इन का मूल नाम 'हरिश्चन्द्र' था, 'भारतेन्दु' उन की उपाधि थी। उन का कार्यकाल युग की सन्धि पर खड़ा है। उनका जन्म 9 सितंबर 1850 और निधन 6 जनवरी 1885 को वाराणसी में हुआ था। इस अवसर पर अशोक कुमार यादव, पलकधारी मंडल, मनीष राज,सूर्यानंद पासवान,गौरी यादव, गणेश दास सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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