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अररिया में भी फूंका गया था स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल

हिन्दुस्तान टीम,अररियाPublished By: Newswrap
Tue, 26 Jan 2021 03:25 AM
अररिया में भी फूंका गया था स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल

अररिया। वरीय संवाददाता

इंडो-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे अररिया जिले में आजादी के संघर्ष का लंबा व सुनहरा इतिहास रहा है। सन 1857 की प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर 1942 की अगस्त क्रांति तक यहां के सपुतों ने देश को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। 1947 में मिली स्वतंत्रता के बाद 1950 में 26 जनवरी को देश में नया संविधान लागू हुआ। आज जिलेवासी 72वां गणतंत्र दिवस मनाएंगे।

इतिहास गवाह है कि 1857 में जब ब्रिटिश के विरूद्ध क्रांति का बिुल बजा तो जलपाईगुड़ी व ढाका में तैनात भारतीय जवानों ने अररिया जिले के नाथपुर में अंग्रेजों को धूल चटाते हुए नेपाल के चतरागद्दी में कोसी पार किया। वहीं अगस्त क्रांति के मौके पर अररिया के सपुतों ने अंग्रेजी बंदूकों के खिलाफ डटकर सामाना किया। इस आंदोलन में पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी गिरफ्तार हो गये। जेल में काफी यातनाएं दी गई। और 1943 में भागलपुर सेन्ट्रल जेल में शहादत प्राप्त की।

जब अंगे्रज ने जुलूस पर चलाई थी गोली: 20 सितंबर 1942 को फारबिसगंज में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जुलूस निकल रहा था। बताया जाता है कि पुलिस ने जुलूस पर गोली चला दी। इस फायरिंग में सुंदर लाल ततमा मौके पर ही शहीद हो गये। इसी तरह रानीगंज के जगत हाजरा व कालीदास अंगे्रजों के बर्बरता का शिकार होकर शहीद हो गये।

सीमांत गांधी के चहेता थे कन्हैया लाल: अररिया आरएस के कन्हैया लाल वर्मा अब्दुल गफ्फार खान उर्फ सीमांत गांधी के चेहता थे। सीमांत गांधी के लाल कुर्ती दल के सक्रिय सदस्य रहे तथा पेशावर जेल (अब पाकिस्तान) में बंद रहकर अनेक तरह की यातनाएं सहते रहे। नरपतगंज के रामलाल मंडल अंगे्रजी हुकूमत की यातनाएं सहकर महात्मा गांधी के सानिध्य में रहकर उन्हें रामायण सुनाने का सुअवसर प्राप्त किया। जोकीहाट प्रखंड अन्तर्गत जहानपुर गांव के पंडित पुण्यानंद झा 1918 में ब्रिटिश हुकूमत की क्रुरता व रॉलेट एक्ट के विरोध में स्कूल छोड़कर गांधीजी के असहयोग आंदालन में कूद पड़े थे। स्वतंत्रता सेनानी राधा मोहन सिंह नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिन्द फौज के सक्रिय सदस्य थे और इनके नाम से अंग्रेजों की रूहें कांप उठती थी।

स्वतंत्रता सेनानियों का कार्यक्षेत्र रहा है अररिया: नरपतगंज के शिवराज सिंह, अररिया आरएस के पंडित रामाधार द्विवेदी, तेतर पासवान, फारबिसगंज के बोकाई मंडल,बाबू बसंत सिंह सहित अमर कथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु भी यहां के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। अशर्फी भगत, लक्ष्मण खतवे, माधव मिश्र, हरि लाल साह, कमलानंद विश्वास, धनुषधारी चौधरी, नागेश्वर झा, बुद्धिनाथ ठाकुर, सूर्यानंद साह, बोधनारायण सिंह, रामानंद सिंह, कलानंद सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का कार्यक्षेत्र अररिया जिला ही रहा है। इन्होंने देश को आजादी दिलाने में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। इनके संघर्ष की कहानी आज भी रौंगटे खड़ी कर देती है। फिलहाल एकमात्र स्वतंत्रता सेनानी भृगूनाथ शर्मा जीवित बचे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के समय यहां की धरती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, अब्दुल गफ्फार खान, जय प्रकाश नारायण, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह जैसे महापुरूषों के पैर पड़े थे।

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