आंतरिक सुरक्षा, घुसपैठ और सीमा प्रबंधन आदि की गृहमंत्री ने की चर्चा

Feb 27, 2026 01:29 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अररिया में एसएसबी के लिए 175 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने सीमाई जिलों के डीएम और एसपी के साथ बैठक की, जहां आंतरिक सुरक्षा और घुसपैठ पर चर्चा की गई। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 12 गांवों के विकास पर भी बात की गई।

आंतरिक सुरक्षा, घुसपैठ और सीमा प्रबंधन आदि की गृहमंत्री ने की चर्चा

अररिया, हिटी कड़ी सुरक्षा के बीच गुरूवार को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह किशनगंज से अररिया पहुंचे। सबसे पहले वे सिकटी प्रखंड स्थित एसएसबी लेटी बीओपी कैंप में विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इसके बाद अररिया समाहरणालय में सात सीमाई जिलों के डीएम, एसपी के साथ बैठक की। इसके बाद वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के चयनित गांव के कार्यान्वयन की समीक्षा की। इस दौरान न केवल लेटी कैंप बल्कि अररिया शहर अभेद्य सुरक्षा दुर्ग में तब्दील रहा। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के वरीय प्रशासनिक के अलावा सीनियर पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह लेटी में नवनिर्मित प्रशासनिक सह आवासीय भवन के साथ-साथ इंदरवा बीओपी का उद्घाटन किया।

साथ ही एसएसबी की विविध परियोजनाओ का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया। लेटी का बिल्डिंग आधुनिक सुविधाओं से लैस है। 250 जवान व अधिकारियों के रहने के लिए बनाये गये हैं। सुविधा संपन्न ने केवल कई कमरे हैं। भोजनालय, रसोईघर, बाथरूम, समीक्षा हॉल, मीटिंग हॉल, शास्त्रागर, वीआईपी रूम, खेल मैदान, पार्किंग, पार्क आदि भी सुविधाओं से लैस है। लेटी से केन्द्रीय गृह मंत्री सीधे अररिया पहुंचे। यहां जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय परिसर में दो बैठकें की। पहली बैठक में ने सीमाई क्षेत्र से जुड़े सात जिले क्रमश: अररिया, किशनगंज, सुपौल, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण के डीएम,एसपी, एसएसबी अधिकारी आदि शामिल हुए । जबकि दूसरी बैठक वाइव्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के कार्यान्वयन को लेकर हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पहली बैठक में आंतरिक सुरक्षा, घुसपैठ और सीमा प्रबंधन जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से समीक्षा की गयी। बैठक में श्री शाह ने घुसपैठ रोकने, डेमोग्राफिक बदलाव, अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन और सुरक्षा के कड़े निर्देश दिये। दूसरी बैठक में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2 के अंतर्गत चयनित गांव के विकास पर चर्चा की गयी। इन चयनित गांव में सड़क संपर्क सुदृढ़ीकरण, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, आजीविका सृजन, कौशल प्रशिक्षण, कृषि उन्नयन, पर्यटन विकास, लघु उद्योग स्थापना, बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार करने का निर्देश दिया गया। बताया गया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चयनित सीमावर्ती गांव के लोगों के जीवन स्तर में सुधार ही नहीं बल्कि अन्तर सीमा अपराधों को रोकना और सीमावर्ती गांव के लोगों को देश की मुख्य धारा में पूरी तरह जोड़ना भी है। यहां बता दें कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2 के तहत अररिया जिले के 12 गांव का चयन किया गया है। ये सुधाकर जी को भी दिये हैं: सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त करने का काम जल्द होगा शुरू गृह मंत्री ने किया एसएसबी के 175 करोड़ की लागत की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास एसएसबी जवानों की थपथपाई पीठ, घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का दोहराया संकल्प बिहार, बंगाल और झारखंड में घुसपैठ की सबसे अधिक समस्या: गृहमंत्री अररिया, संवाददाता जिला भ्रमण के दौरान केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को भारत नेपाल सीमा से सटे जिले के सिकटी प्रखंड अंतर्गत लेटी और इंदरवा में एसएसबी के लिए लगभग 175 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में जहां उन्होंने नेपाल और भूटान सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात एसएसबी जवानों और अधिकारियों की पीठ थपथपाई। वहीं दूसरी तरफ सीमांचल सहित पूरे देश से घुसपैठियों को चुन चुन कर बाहर निकालने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त कराने की योजना पर जल्द अमल शुरू होगा। भारत माता की जय के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठ की सबसे अधिक समस्या बिहार, बंगाल और झारखंड में है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उठाए गए घुसपैठियों के मुद्दे की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि वो कोई चुनावी वादा नहीं था, बल्कि भाजपा और केंद्र सरकार घुसपैठियों को चुन चुन कर देश से बाहर निकालने के लिए दृढ़ संकल्पित है। गृह मंत्री ने कहा कि बिहार की जनता ने विकास के साथ साथ घुसपैठ के मुद्दे पर भी अपनी मुहर लगाई थी। लिहाजा अब घुसपैठियों को बाहर निकालने का काम शुरू करना है। उन्होंने कहा कि केवल मतदाता सूची से नाम हटाना घुसपैठ से मुक्ति नहीं है बल्कि एक एक को चिन्हित कर देश से बाहर निकालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों केवल गरीबों के राशन की हकमारी ही नहीं कर रहे बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अपने भ्रमण के दौरान वो अधिकारियों के साथ बैठक कर एक विस्तृत कार्य योजना बना रहे हैं। इस क्रम में सबसे पहले सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर तक सभी अवैध अतिक्रमण को हटाया जाएगा। वहीं जनसांख्यिकी परिवर्तन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठ के जरिए जनसांख्यिकी परिवर्तन देश के लिए खतरा है। इसके चलते संस्कृति, इतिहास और भूगोल सबके लिए खतरा पैदा हो जाता है। जनसांख्यिकी परिवर्तन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति इसका अध्ययन कर समाधान के लिए अपनी अनुशंसा देगी। एसएसबी को शाबाशी: समारोह के दौरान गृह मंत्री ने भारत नेपाल की 1751 किलोमीटर और भूटान की लगभग 700 किलोमीटर सीमा की सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत करने के लिए एसएसबी की पीठ थपथपाते हुए कहा कि हालांकि जिन सीमाओं की सुरक्षा एसएसबी के जिम्मे है उन देशों से भारत के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं लेकिन दुश्मन तत्व उन रास्तों का इस्तेमाल कर देश में प्रवेश कर सकते हैं। लिहाजा एसएसबी को न केवल पैनी नजर रखनी होगी बल्कि सूचना तंत्र भी पुख्ता होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सीमावर्ती गांव के लोगों से अच्छे संबंध बने रहें। यही नहीं बल्कि सीमा पार तैनात सशस्त्र बलों से सहयोग का भी आदान प्रदान जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्मगलिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग पर भी पैनी नजर रखने की जरूरत है। इसी क्रम में उन्होंने एसएसबी के आलाधिकारियों से एसओपी बनाने को भी कहा। इस मौके पर गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि आज उनके लिए खुशी का दिन है क्योंकि वे एसएसबी के जवानों और अधिकारियों के लिए 175 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने एसएसबी के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं को गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार एसएसबी और उनके परिवार की खुशहाली के लिए दृढ़ संकल्पित है। वहीं भारत नेपाल सीमा सड़क योजना के बाबत उन्होंने कहा कि 554 किलोमीटर बॉर्डर रोड को स्वीकृति दी गई। 18 में से 14 खंडों का काम पूरा हो चुका है। बाकी चार खंडों में भी तेजी से काम हो रहा है। लगभग 2300 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

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