Hindi NewsBihar NewsAraria News12-Year-Old Boy Rescued from Human Traffickers After 15 Years of Torture in Myanmar
16 लाख में बेचा, दिन-रात लोहे की फैक्ट्री में काम कराया और इंजेक्शन से खून निकाला

16 लाख में बेचा, दिन-रात लोहे की फैक्ट्री में काम कराया और इंजेक्शन से खून निकाला

संक्षेप:

जमशेद उर्फ मुन्ना, जो 12 साल की उम्र में मानव तस्करों द्वारा म्यांमार भेजा गया था, 15 साल बाद अपनी मां से मिला। उसकी मां ने कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद अदालत ने उसे वापस लाने का आदेश दिया। मुन्ना ने बताया कि उसे जानवरों की तरह रखा गया और कई यातनाएं झेलनी पड़ी।

Jan 07, 2026 12:14 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, अररिया
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अररिया, निज संवाददाता वह महज 12 साल का था, जब गांव के ही तीन लोगों ने बनारस के एक मदरसा में भर्ती कराने के नाम पर उसे ले जा कर बनारस के कालीन फैक्ट्री में रख दिया। ये 2010 की बात है। दस दिन कालीन फैक्ट्री में रखने के बाद उसे मानव तस्करों के हाथ 16 लाख में बेच दिया गया। इसके बाद उसे नागालैंड ले जाया गया और वहां से म्यांमार लोहे की सरिया बनाने की फैक्ट्री में भेज दिया गया। यही शुरू होती है उनकी यातनाओं की कहानी। उनकी दर्द भरी दास्तान सुनते हुए जब उसके शरीर पर नजर पड़ी तो वहां चोट, खरोंच और इंजेक्शनों के निशान भरे पड़े थे।

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12 साल का बालक जमशेद उर्फ मुन्ना अब 27 साल का हो गया है और 15 साल तक पल-पल यातनाएं सह कर अपनी मां के पास पहुंच गया है। मंगलवार की सुबह मां के साथ उसने अपनी दर्द भरी दास्तान बताते हुए कहा कि म्यांमार में उसे जिस सरिया की फैक्ट्री में रखा गया था वह दो तरफ समुद्र और दो तरफ पहाड़ से घिरा था। फैक्ट्री की दीवारें ऊंची थीं। जहां लोहे की रॉड बनाया जाता था। पूरे परिसर में तीन गेट थे और हर गेट पर हथियारबंद गार्ड तैनात रहते थे। चारों ओर कैमरों से निगरानी की जाती थी, ताकि कोई भाग न सके। जमशेद उर्फ मुन्ना ने बताया कि वहां मजदूरों को जानवरों से भी बदतर हालात में रखा जाता था। जब वह घर जाने की बात करता तो उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। एक बार उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पकड़े जाने के बाद उसकी इतनी पिटाई की गई कि शरीर में तीन जगह टांके लगाने पड़े। फैक्ट्री में काम करवाने वाले ने उन्हें बताया था कि उसे 16 लाख रुपए में बेच दिया गया था और जब तक यह रकम वसूल नहीं हो जाती, तब तक उसे घर जाने की इजाजत नहीं मिलेगी। जमशेद उर्फ मुन्ना ने बताया कि उन्हें 24 घंटे में कभी एक बार तो कभी दो बार ही खाना दिया जाता था। कभी-कभी तो खाना दिया भी नहीं जाता था।कंपनी के लोग इंजेक्शन से खून निकालते थे। काम करने पर जब हमलोग थकते थे, तो नशे का इंजेक्शन लगाते थे और काम करवाते थे। जमशेद उर्फ मुन्ना ने बताया कि वह म्यांमार में यातनाएं झेल रहा वहीं अररिया में उनकी मां ने मेरे लिए 15 साल कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थी।इसके बाद उनकी मां की जीत हुई और वह अपने घर वापस आ पाया।वे जज साहब का शुक्रगुजार है कि उन्होंने ऐसा फैसला दिया जिसकी वजह से वह अपनी मां से मिल पाया। कोर्ट के दबिश के बाद दलालों ने म्यांमार से घर भेजा: जमशेद उर्फ मुन्ना ने बताया कि अदालत की सख्ती का असर की वजह से ही उसे दलालों ने नागालैंड से कामख्या फिर अररिया लाया। उसने बताया कि म्यांमार स्थित लोहे की फैक्ट्री में उसे तिरपाल से ढका एक ट्रक पर बैठाया गया फिर उसे नागालैंड के रास्ते कामख्या लाया और वहां से ट्रेन से अररिया लाया गया। उन्होंने बताया कि अररिया रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद दलालों ने एक ऑटो से उठे उसे सीधे अपने घर ले गया। वहां कुछ देर रुकने के बाद वे लोग उसे लेकर बौसी थाना गये।जहां बौसी पुलिस ने उसे बेवजह चार दिनों तक हाजत में बंद रखा। इसके बाद गांव के ही एक व्यक्ति ने थाना से उसे अपने घर ले लिया। उसने भी अपने घर में बंद कर उसे छह दिनो तक रखा। हालांकि जमशेद के आने की भनक उनकी मां को लग गई थी। उसने सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष दीपक कुमार वर्मा से संपर्क किया। सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष ने बौसी पुलिस बरामद जमशेद को सीडब्ल्यूसी ने प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके बाद आनन फानन में बौसी पुलिस ने सोमवार को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया।इसके बाद सीडब्ल्यूसी ने जमशेद की काउंसलिंग की और उसे परिजनों को सौंपा। मां के संघर्ष और कोर्ट के दबाव के से मुक्त हुआ बिछड़ा बेटा: 2010 में जमशेद के गायब होने के बाद से उसकी मां जरीना खातून ने बौसी थाने में तीन लोगों के खिलाफ केस किया था।मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट कचहरी के चक्कर में जरीना ने अपनी जमीन जायदाद सब भेज दी।इसके बाद अररिया नगर परिषद क्षेत्र के रजोखर के एक सामाजिक कार्यकर्ता मो मुजाहिद आलम ने उन्हें में पनाह दी और उसे रहने के लिए घर दिया।10 साल से जरीना रजोखर में ही रहकर कोर्ट में संघर्ष करती रही। आखिरकार कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने फेकन उर्फ जावेद नाम के एक आरोपी को 2025 में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जमशेद उर्फ मुन्ना को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। इसके लिए अररिया कोर्ट ने आरोपी को तीन महीने का वक्त दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमशेद वापस नहीं आया तो सभी आरोपियों की जमीन जायदाद जब्त की जाएगी।अंतत: लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट और पुलिस की दबिश के बाद बालक को मानव तस्करों के हाथों सौंपने वाले बिचौलिए दबाव में आ गए और उसे खुद म्यांमार से नगालैंड होते हुए वापस अररिया ले आए।