अब स्कूल नहीं तय करेंगे दुकान, कहीं से भी खरीदें कॉपी-किताब; दबाव बनाने पर डंडा चलेगा
अररिया डीएम विनोद दूहन ने निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाते हुए सख्त आदेश जारी किया है। अब स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से ड्रेस या किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

Bihar News: बिहार में न्यू सेशन शुरू होते ही निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ के खिलाफ प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। बिहार के अररिया जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ डीएम विनोद दूहन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी जारी की है। डीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी प्राइवेट स्कूल अब अभिभावकों को किसी खास दुकान से ही ड्रेस, किताब या अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
अभिभावकों की जेब पर डाका डालने वालों पर होगी कार्रवाई
अक्सर देखा जाता है कि निजी स्कूल प्रबंधकों की कुछ चुनिंदा दुकानदारों के साथ साठगांठ होती है, जहाँ से किताबें और ड्रेस दोगुने दामों पर बेची जाती हैं। स्कूल प्रशासन पेरेंट्स पर दबाव बनाता है कि वे सामग्री वहीं से लें। इस 'कमीशनखोरी' के खेल को खत्म करने के लिए डीएम विनोद दूहन ने सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि "स्कूलों का काम शिक्षा देना है, व्यापार करना नहीं।" यदि कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान का प्रचार करता है या वहां से सामान खरीदने के लिए किसी पेरेंट्स को मजबूर करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और उस स्कूल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वेबसाइट पर जारी करनी होगी लिस्ट
प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया है कि सभी प्राइवेट स्कूलों को किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री की पूरी लिस्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट और स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी। इससे अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खुले बाजार में कहीं से भी सामग्री खरीद सकेंगे। डीएम ने जिले के अभिभावकों से अपील की है कि वे डरे नहीं और स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाएं।
उन्होंने कहा, "अगर कोई स्कूल आपको मजबूर करता है, तो तुरंत जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के कार्यालय में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराएं।" डीएम ने भरोसा दिलाया है कि प्राप्त शिकायतों पर प्रशासन तुरंत संज्ञान लिया जाएगा और दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। बता दें कि शासन के इस कदम से उन हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, जो हर साल सत्र की शुरुआत में स्कूलों की अवैध वसूली और मनमानी के बोझ तले दब जाते थे।
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