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आरासदर अस्पताल में ब्लैक फंगस से बचाव के लिए बना वार्ड

हिन्दुस्तान टीम,आराPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 11:20 PM
सदर अस्पताल में ब्लैक फंगस से बचाव के लिए बना वार्ड

आरा। हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

सदर अस्पताल में ब्लैक फंगस से बचाव के लिए वार्ड बनाया गया है। ब्लैक फंगस के मरीज मिलने पर इस वार्ड में भर्ती किया जायेगा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम प्राथमिक उपचार शुरू करेंगे। सोमवार को सदर अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के एक कमरे को फंगल वार्ड घोषित करते हुए इसका उद्घाटन किया गया। वार्ड का नोडल अफसर डॉ केएन सिन्हा को बनाया गया है। विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ आरएन प्रसाद, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ एसके प्रसाद, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ प्रतीक, फिजीशियन डॉ राजीव सिंह और सर्जन डॉ विकास सिंह शामिल है। फंगल वार्ड में 12 बेड है। वार्ड के नोडल अफसर डॉ सिन्हा ने बताया कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच एक और फंगल बीमारी का प्रकोप दिखाई पड़ने लगा है जो बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बिहार सरकार के निर्देशानुसार जिला अस्पताल में एक फंगल वार्ड का गठन कर उसमें संक्रमित रोगी को भर्ती कर इलाज करना है। इसी के तहत भोजपुर आरा के सदर अस्पताल में भी सोमवार को फंगल वार्ड का उद्घाटन किया गया। इसमें ब्लैक फंगस बीमारी और म्यूकर माइकोसिस से ग्रसित गंभीर रोगियों को भर्ती करने का प्रावधान है। बढ़ती बीमारी के कारण संभावित मरीजों की देखरेख के लिए इस वार्ड को गठन किया गया।

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भोजपुर में म्यूकर माइकोसिस के तीन संदिग्ध

आरा। भोजपुर में म्यूकर माइकोसिस के लक्षणों वाले तीन संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें से दो मामला सदर अस्पताल और एक प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ एसके केडिया के लक्ष्मी नेत्रालय में पिछले एक महीने के भीतर रिपोर्ट हुआ है। हालांकि अब तक तीनों में से किसी की अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सिविल सर्जन डॉ एलपी झा ने बताया कि डॉक्टर आशीष की अनुशंसा पर पिछले एक महीने में दो मरीज को पटना रेफर किया गया है। इसमें एक सदर अस्पताल में भर्ती मरीज भी शामिल है। हालांकि पटना से इनमें से किसी की रिपोर्ट अब तक अस्पताल प्रबंधन को नहीं मिली है। बताया जाता है कि सभी तीन मामले लक्ष्मी नेत्रालय के डॉ आशीष के पास एक्सपर्ट ओपीनियन के लिए भेजा गया था। डॉक्टर आशीष ने इनमें से दो मामलों में म्यूकर माइकोसिस के लक्षणों की पहचान करते हुए उसकी पुष्टि के लिए उच्च संस्थान में रेफर करने की सलाह दी, जबकि एक मरीज का परीक्षण वे खुद कर रहे हैं।

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