भोजपुर : ओडिशा से दीघा पहुँचे ट्रक चालक की अर्थी को दूधमुंहे बेटों ने दिया कंघा,बिलख पड़ा इलाका

Newswrap हिन्दुस्तान, आरा
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भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड के दीघा गांव में ट्रक चालक ज्ञानी यादव की मौत के बाद उनके छोटे बच्चों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया। यह दृश्य देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गए। ज्ञानी परिवार के एकमात्र आर्थिक सहारा थे और उनके पीछे 70 वर्षीय माता और विधवा पत्नी हैं।

भोजपुर : ओडिशा से दीघा पहुँचे ट्रक चालक की अर्थी को दूधमुंहे बेटों ने दिया कंघा,बिलख पड़ा इलाका

​ जगदीशपुर (भोजपुर), निज संवाददाता । कहते हैं पिता बच्चों की दुनिया का सबसे मजबूत कंधा होता है, लेकिन नियति ने भोजपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड के दीघा गांव में बुधवार को ऐसा क्रूर दृश्य दिखाया जिसे देख पत्थर दिल भी पसीज गए। ओडिशा में रोजी-रोटी कमाने गए 30 वर्षीय ट्रक चालक ज्ञानी यादव का पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा, तो चीत्कारों से आसमान दहल उठा। सबसे मार्मिक क्षण वह था जब उन दुधमुंहे बच्चों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया, जो अभी ठीक से दुनिया को पहचानते भी नहीं हैं। मासूम हथेलियों को पिता की अंतिम यात्रा का सहारा बनते देख वहां मौजूद हजारों लोगों का कलेजा मुंह को आ गया और पूरा इलाका फफक पड़ा। बता दे कि जगदीशपुर के दीघा निवासी ज्ञानी यादव परिवार के एकमात्र आर्थिक आधार थे। उनके पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। गुरुवार को शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। घर में 70 वर्षीया वृद्ध माता और विधवा पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। ज्ञानी के पीछे उनकी दो छोटी बेटियां और एक मासूम बेटा है। अंतिम यात्रा के दौरान जब इन मासूमों ने कंधा दिया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। गांव की गलियों से निकली शव यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा।

पूर्व विधायक का परिवार के प्रति समर्थन

सूचना मिलते ही पूर्व विधायक भाई दिनेश शोकाकुल परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने न केवल परिजनों को ढांढस बंधाया, बल्कि खुद अर्थी को कंधा देकर बक्सर घाट तक अंतिम यात्रा में शामिल रहे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मृतक के परिजनों को ड्राइविंग लाइसेंस इंश्योरेंस, पारिवारिक लाभ योजना और आयुष्मान कार्ड का लाभ शीघ्र दिलाया जाए। साथ ही, समाज कल्याण विभाग के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया। अंतिम विदाई में रामजी सिंह, रंग लाल सिंह, टूटू यादव, बीरबल पासवान, धर्मराज सिंह, मनोज सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। श्मशान घाट पर बच्चों की चीखों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया। ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित परिवार के लिए तत्काल विशेष आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञानी यादव कौन थे?
ज्ञानी यादव एक 30 वर्षीय ट्रक चालक थे जो ओडिशा में रोजी-रोटी कमाने गए थे।
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