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24 नवंबर, 2020|11:44|IST

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लॉक डाउन में बदहाल मूर्तिकार राहत की लगाये हैं आस

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कोरोना के कारण उत्पन्न संकट में मृर्तिकार बेहाल व बदहाल हो गये हैं। लॉक डाउन में बदहाल मूर्तिकार राहत की आस सरकार से लगाये हुए हैं। दशहरा से दीपावली तक मूर्तिकारों का सीजन रहता है। दशहरा के लिए सावन के शुरू होने के साथ ही मूर्तियों के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाता था, लेकिन इस बार सब ठप पड़ा है। मूर्तिकार बताते हैं कि अगर सब कुछ सामान्य रहता तो अब तक दशहरा के लिए मूर्ति बनाने का आधा काम हो चुका रहता। जबकि स्थिति यह है कि बोहनी भी नहीं हुई है। ऐसे में मूर्तिकारों का घर चलाना भी मुश्किल हो गया है और कई जरूरी काम भी नहीं हो पा रहे हैं।

शहर में 19 मूर्तिकार, हर कोई 4 लाख तक कर लेता था कमाई

शहर में 19 मूर्तिकार हैं। एक मूर्तिकार दशहरा, दीपावली व सरस्वती पूजा सहित अन्य आयोजनों के लिए मूर्ति तैयार कर लगभग चार लाख तक की कमाई कर लेता था। मूर्तिकारों ने बताया कि दशहरा के लिए एक सेट मूर्ति तैयार करने में लगभग ढाई माह का समय लगता है। पिछले साल किसी ने पांच तो किसी ने सात सेट मूर्तियां तैयार की थी।

मूर्ति बनाने का काम बंद होने पर करनी पड़ रही मजदूरी

मूर्तिकारों की हालत इस समय इतनी पतली है कि अब मजदूरी करनी पड़ रही है। शहर के सबसे चर्चित करमन टोला स्थित कलाकरों की टोली में मिले मूर्तिकार मनोज ने बताया कि पिता भरत मिस्त्री के साथ मिलकर मूर्ति बनाने का काम करता है। पिछले साल सात सेट मूर्ति तैयार की थी। उसने बताया कि काम बंद होने के कारण 350 रुपये रोज पर मजदूरी कर अभी लौटा हूं। वहीं मूर्तिकार गणेश मिस्त्री, मुन्ना मिस्त्री, रवि मिस्त्री व मौलाबाग के दिनेश मूर्तिकार ने कहा कि काम बंद होने से आर्थक तंगी झेलनी पड़ रही है।