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आरारोहिणी नक्षत्र आज से

हिन्दुस्तान टीम,आराPublished By: Newswrap
Mon, 24 May 2021 11:20 PM
रोहिणी नक्षत्र आज से

आरा/पीरो। संवाद सूत्र

कोरोना काल में भी भोजपुर जिले के किसानों ने धान की फसल की खेती की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। बिचड़ा डालने के लिए सरकार ने बीज का आवंटन कर दिया है। बीज खरीदने के लिए ऑनलाइन आवेदन किसानों से मांगे गये थे। नौ हजार 530 किसानों ने 975.4 क्विंटल बीज के लिए आवेदन किया है। संबंधित प्रखंड कृषि पदाधिकारियों की ओर से पांच हजार 724 किसानों का आवेदन जिला कृषि पदाधिकारी को भेज दिया गया है। बगैर कारण बताये 20 किसानों का आवेदन रद्द कर दिया गया है और तीन हजार 786 किसानों का आवेदन सभी 14 प्रखंडों में पेंडिंग है। जिला कृषि कार्यालय से ओटीपी 24 किसानों को भेजा जा चुका है और 57 सौ किसानों का ओटीपी पेंडिंग है।

सबसे अधिक तरारी तो सबसे कम संदेश के किसानों का आवेदन

खरीफ फसल की खेती के दौरान बीज के लिए सबसे अधिक तरारी के 1368 और सबसे कम संदेश के 327 किसानों ने आवेदन किया है। कृषि विभाग के सूत्रों से प्राप्त आंकड़े के मुताबिक अगिआंव प्रखंड के 439, आरा के 512, बड़हरा के 366, बिहिया के 685, चरपोखरी के 663, गड़हनी के 857, जगदीशपुर के 953, कोईलवर के 474, पीरो के 705, सहार के 1120, शाहपुर के 524 और उदवंतनगर के 537 किसानों ने आवेदन किया है।

घर बैठे बीज मंगाने को 1074 किसानों ने किया आवेदन

घर बैठे बीज मंगाने को लेकर 1074 किसानों ने कृषि विभाग के पोर्टल पर आवेदन किया है। आवेदकों के अनुसार 109.700 क्विंटल बीज घर मंगाया जाना है। संबंधित प्रखंडों के बीएओ की ओर से 691 आवेदकों का आवेदन जिला कृषि कार्यालय को भेज दिया गया है। 383 किसानों का आवेदन बीडीओ के पास लंबित है। महज एक किसान के आवेदन को जिला कृषि कार्यालय से ओटीपी के लिए भेजा गया है, जबकि 690 किसानों का आवेदन जिला कृषि कार्यालय में पेंडिंग पड़ा है।

विक्रेताओं की सूची कर दी गयी सार्वजनिक

आवंटन के अनुसार विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक कर दी गयी है। आरा में मेसर्स साधु टेडर्स, मेसर्स सरस्वती बीज भंडार, मेसर्स जय माता दी कसाप, सहार में मेसर्स कुशवाहा बीज भंडार, अगिआंव में मेसर्स रिया सीड्स व आरा में मेसर्स जयप्रकाश नारायण को अधिकृत किया गया है। हाल के दिनों में कृषि विभाग की ओर से भोजपुर जिले को 2399.74 क्विंटल बीज का आवंटन किया गया है। एकीकृत बीज ग्राम योजना के तहत 300 क्विंटल का आवंटन देने की बात कही गयी है।

तय समय पर किसानों को मिलेगा ओटीपी

भोजपुर जिले के किसानों को तय समय पर ओटीपी मिल जायेगा। जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार के अनुसार कोरोना काल में लॉकडाउन के बावजूद बीज की खरीदारी को लेकर किसानों को ओटीपी दिया जा रहा है, ताकि किसान समय पर बीज की खरीदारी कर बिचड़ा तैयार कर सकें।

भोजपुर जिले को आवंटित बीज एक नजर में:-

श्री विधि -18.90 क्विंटल जीरो टिलेज :-171.9 क्विंटल तनाव रोधी :-95.50 क्विंटल शंकर धान :330 क्विंटल पैडी ट्रांसप्लांटर ;-43 क्विंटल एकीकृत बीज ग्राम योजना:-330 क्विंटल शंकर मक्का:7.2 क्विंटल

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समस्या : कृषि विज्ञान केंद्र के लोकल कतरनी के बीज से किसान वंचित

मौसम की मार

किसानों को इस साल उपलब्ध नहीं करा पा रहा धान का उत्तम व आधुनिक बीज

पिछले साल भारी बरसात में बिचड़ा ही सड़ जाने से तैयार नहीं हो सका था बीज

-आरा स्थित भोजपुर कृषि विज्ञान केंद्र का फोटो

आरा। हिन्दुस्तान टीम

रोहिणी नक्षत्र आज मंगलवार से शुरू हो रही है। किसान धान का बिचड़ा इसी नक्षत्र से गिराना शुरू करते हैं। हालांकि इस साल जिले के किसानों को भोजपुर कृष विज्ञान केंद्र धान का उन्नत बीज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। केंद्र के लोकल कतरनी बीज से भी वंचित रहेंगे जिले के किसान। केंद्र से धान के बीज के बारे में अजीत सिंह, दीपक कुमार ओझा समेत अन्य किसान पूछ रहे हैं कि कब तक बीज मिलेगा पर कृषि विज्ञान केंद्र के हेड डॉ पीके द्विवेदी इस साल केंद्र से धान का उन्नत बीज उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर दे रहे हैं। बता दें कि पिछले साल भारी बारिश का कहर ऐसा रहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र का धान का बिचड़ा ही डूबकर खराब हो गया। इससे बीज का उत्पादन नहीं हो सका था। बेहतर बीज के लिए किसान कृषि विज्ञान केन्द्र में संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनको बीज नहीं मिल रहा है।

किसानों को दिया जाता था पांच सौ क्विंटल बीज

भोजपुर कृषि विज्ञान केन्द्र प्रत्येक वर्ष जिले के हजारों किसानों को बीज उपलब्ध कराता रहा है। हर साल लगभग पांच सौ क्विंटल बीज का उत्पादन कर किसानों को दिया जाता था। कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी के अनुसार बीपीटी-5204 (लोकल कतरनी) और राजेन्द्र श्वेता का उत्तम बीज तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। पिछली बार भी बीज के लिए बिचड़ा डाला गया था, जो नष्ट हो गया।

बारिश के साथ जलजमाव की भी समस्या

धान का बिचड़ा बर्बाद होने के पीछे बारिश के साथ जलजमाव को भी कारण बताया गया है। एक तो पिछले साल बारिश भी काफी हुई थी और दूसरी ओर जलजमाव से धान का बिचड़ा सड़ गया। कृषि विज्ञान केन्द्र की जमीन की चारों तरफ घनी आबादी है। घरों से निकलने वाले पानी के निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पानी कृषि विज्ञान केन्द्र के बिचड़ा वाले खेतों में ही लगा रह गया, जिससे भी बिचड़ों को नुकसान हुआ।

क्या कहते हैं अधिकारी

दो किस्म के धान के बिचड़े डाले गये थे। कुछ बिचड़े बारिश तो कुछ जलजमाव के कारण सड़ गये। ऐसे में इस बार किसानों को धान का बीज कृषि विज्ञान केन्द्र उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। बीज के लिए किसान संपर्क भी कर रहे हैं, तो उनको दूसरे विकल्प के बारे में बताया जा रहा है।

डॉ पीके द्विवेदी, हेड, कृषि विज्ञान केन्द्र, भोजपुर

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