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बोले आरा : मिल्की अनाईठ के लोगों को जलजमाव से कब मिलेगा स्थायी छुटकारा

बोले आरा : मिल्की अनाईठ के लोगों को जलजमाव से कब मिलेगा स्थायी छुटकारा

संक्षेप:

आरा के मिल्की अनाईठ मोहल्ले में जलजमाव की समस्या से लोग परेशान हैं। नगर निगम के अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल रहा है। हाल ही में, नागरिकों ने सड़क पर उतरकर अपनी...

Aug 10, 2025 04:43 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, आरा
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प्रस्तुति : प्रशांत कुमार/विनीत पांडेय फोटो : आरा नगर निगम के मिल्की अनाईठ मोहल्ले में आपके अपने प्रिय अखबार हिन्दुस्तान की ओर से बोले आरा संवाद में अपनी समस्याओं को साझा करते लोग -आरा के मिल्की अनाईठ मोहल्ले के रोड पर लगा नाले का गंदा पानी और जैसे-तैसे पार कर जाते लोग : फाइल फोटो इंट्रो : आरा शहर के वार्ड 42 का इलाका लंबा-चौड़ा है। आबादी भी अन्य वार्डों की तुलना में अधिक है। पश्चिमी रेलवे ओवरब्रिज के दोनों ओर वार्ड का विस्तार है। इस वार्ड में नये इलाके बसते गये। इस अनुपात में यहां के नागरिकों को सुविधाएं आरा नगर निगम की ओर से नहीं मिल रही हैं।

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हाल के दिनों में यहां के लोग नाली, गली और स्ट्रीट लाइट की समस्या से परेशान हैं। जलजमाव की अलग समस्या है। इसके समाधान के लिए लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा। इसके बाद रोड काटकर पानी का बहाव किया गया है, फिर भी अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। नतीजतन अब भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश होने पर यह समस्या और बढ़ जाती है। कई बार वाहनों का दुर्घटना भी हो जाता है। यहां के लोग जलजमाव के स्थायी निदान का इंतजार करने के साथ ही अन्य सुविधाएं चाह रहे हैं। अब देखना यह है कि यहां के लोगों को जलजमाव से कब तक स्थायी तौर पर छुटकारा मिलता है ताकि इसके लिए फिर से सड़क पर न उतरना पड़े। फोटो : आरा नगर निगम का वार्ड नंबर 42 शहर के रेलवे ओवरब्रिज के दक्षिणी हिस्से में स्थित है। वार्ड की आबादी लगभग 15 हजार है। इसका इलाका बिहारी मिल से जीरो माइल से होते हुए भेलाई स्कूल तक है। वहीं जगदेवनगर का पूरा इलाका और मिल्की अनाईठ भी इसी के हिस्से में आता है। मिल्की अनाईठ हाल के दिनों में जलजमाव के कारण काफी चर्चा में रहा है। यहां के लोग जलजमाव से काफी दिनों से परेशान थे। नगर निगम प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी पानी की निकासी की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा था। पूर्व में कई बार पंप के सहारे पानी की निकासी की गयी थी। इस साल बारिश होने पर स्थिति बिगड़ती चली गयी। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ती थी। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी झेलनी पड़ती थी। कई लोग तो बाइक से जलजमाव पार कराते थे। जिनके पास बाइक नहीं थी, वे अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिये थे। धीरे-धीरे लोगों का रोष बढ़ता गया और जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए लोग हाल में ही सड़क पर उतरे। इसके बाद प्रशासन एक्शन में आया। नगर निगम के अधिकारी और पुलिस प्रशासन लोगों की समस्या के समाधान करने के लिए मौके पर पहुंचा। निगम प्रशासन की ओर से मिल्की अनाईठ की ओर से रास्ते काटकर जगदेवनगर के नाले में मिलाया गया। इसके बाद समस्या का अस्थायी समाधान हो सका। इसके बाद डीएम ने भी यहां की समस्या को ले बैठक की। नाला बनाने के लिए निर्देश दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि नाले के निर्माण के लिए पीडब्लूडी के इंजीनियर ने मापी कर ली है। अब प्राक्कलन तैयार कर निर्माण शुरू करना है। लेकिन, अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। पहले रोड काटने को ले था मतभेद, अब नाला निर्माण का इंतजार मिल्की अनाईठ से जलनिकासी को ले कई तरह के मतभेद भी थे। इसको नहीं पाटने से समस्या बढ़ती ही चली गयी। पहले जगदेवनगर के लोग भी उस तरफ पानी की निकासी होने के पक्ष में नहीं थे। दूसरा रोड पीडब्लूडी के होने के कारण नगर निगम की ओर से इसे काटा नहीं जा रहा था। इस कारण समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। आंदोलन के बाद समस्या के समाधान का रास्ता निकला है। अब नाले के निर्माण का इंतजार किया जा रहा है ताकि इसका स्थायी समाधान हो सके। वार्ड 42 में नई बस्ती बसने के बाद भी नाली, गली और सार्वजनिक शौचालय नहीं वार्ड 42 में नई बस्ती बसने के बाद भी यहां के लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वार्ड में द्वारिकापुरी, गणेशपुरी, विष्णु नगर सहित अन्य कई बस्ती बसी है। इन इलाकों में अब तक नगर निगम के विकास की किरण नहीं पहुंच पायी है। यहां के लोग नाली, गली और जलजमाव की समस्या झेल रहे हैं। बारिश होने पर घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। कारण कि घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। पानी गलियों और सड़कों पर पसर जाता है। बड़ी आबादी वाले वार्ड में एक ही सामुदायिक भवन है। जगह के अभाव में नये सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं हो रहा है। शादी-विवाह व अन्य समारोहों के लिए यहां के लोगों को निजी विवाह भवन पर निर्भर रहना पड़ता है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक परेशानी होती है। वार्ड में दो जगहों पर सामुदायिक शौचालय है। इसमें एक मुसहर टोली व दूसरा झोपड़पट्टी में स्थित है। महिलाओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है। नल-जल योजना की स्थिति भी वार्ड में खराब है। 15 हजार की आबादी वाले वार्ड में महज कुछ घरों तक ही योजना पहुंच सकी है। बड़ी आबादी अब भी इस योजना के लाभ से वंचित है। डिवाइडर के पास संकेतक नहीं होने से हो रहीं दुर्घटनाएं बाजार समिति के कृष्णा जी के मार्केट के समीप सड़क पर डिवाइडर बनायी गयी है। इसके बाद भी यहां किसी तरह का संकेतक नहीं लगाया गया है। इससे रात में वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। कई बार लोग दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। बीते सप्ताह शुक्रवार की रात भी एक चारपहिया वाहन तेज गति में होने के कारण डिवाइडर पर टकरा कर दुर्घटना का शिकार हो गया। वाहन पर पूरा परिवार था। स्थानीय लोगों ने पलटी गाड़ी को सीधा कर सहायता की। स्थानीय लोग बताते हैं कि इसी तरह की दुर्घटना कई बार हो चुकी है। इसके बाद भी कोई संज्ञान लेने वाला नहीं है। समय रहते संकेतक नहीं लगा तो किसी दिन बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। सुझाव 1.नल-जल योजना का लाभ दिलाने के लिए संबंधित एजेंसी पर दबाव डालना चाहिए, ताकि इसका लाभ लोगों को मिल सके। 2. वार्ड की आबादी के अनुसार स्ट्रीट लाइट लगाने की व्यवस्था होनी चाहिए। पहले से लगी लाइट खराब हो चुकी है। 3.वार्ड के नई आबादी वाले इलाके में नगर निगम की ओर से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। 4.बड़ी आबादी वाले मोहल्ले और वार्ड में सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़नी चाहिए। 5. नगर निगम की ओर से उपलब्ध फंड से वार्ड के नये इलाके में सड़क और गली का निर्माण करना चाहिए। शिकायतें 1.वार्ड में महज दस फीसदी लोगों को भी इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इससे पेयजल आपूर्ति की समस्या झेलनी पड़ती है। 2.वार्ड में पुरानी स्ट्रीट लाइट काफी दिनों से खराब पड़ी है। इसकी अब तक मरम्मत नहीं की जा सकी है। 3.वार्ड में नई बस्ती के बसने के बाद भी वहां के लोगों को शहरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। 4. वार्ड में दो सार्वजनिक शौचालय हैं, लेकिन महिलाओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है। 5. बढ़ती आबादी और नयी कॉलोनी बनने के बाद भी सड़क और गली का निर्माण नहीं हो रहा है। कोट सरकार को टैक्स देते हैं, लेकिन जनसमस्याओं का निदान नहीं होने से निराशा होती है। नगर निगम के पदाधिकारी नागरिक सुविधाओं के लिए सजग नहीं हैं। शिकायत के बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे परेशानी और अधिक बढ़ने की आशंका है। ओजेरुल हक जैसे ही बारिश होती है, वार्ड के साथ पूरे अगल-बगल के नाले का पानी सड़कों पर बहने लगता है। थोड़ी ही देर में वार्ड में काफी जलजमाव हो जाता है। घरों से निकलना दूभर हो जाता है। जलजमाव से अधिक परेशानी होती है। इसका स्थायी निदान की जरूरत है। रिंकू पिछले कई वर्षों से जलजमाव और नाले की गंदगी से लोग जूझ रहे हैं। बिन बारिश भी यहां नाले के पानी से जलजमाव की स्थिति रहती है। नगर निगम के अधिकारी ध्यान दें तो समस्या दूर होगी। प्रशासन को समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। जलालुद्दीन वार्ड में पहले सड़कें चौड़ी थीं, लेकिन अब अतिक्रमण के कारण कई जगहों पर सड़कें संकरी हो गई हैं। जलजमाव और कीचड़ के कारण काफी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। आने-जाने का रास्ता नहीं है। सड़क और नाले का निर्माण होना चाहिए। अमानत घर के आसपास नाले का पानी जमा रहता है। गंदा पानी की निकासी के लिए सरकार की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। नाली और सड़क बस नाम का है, जिसके कारण आवागमन में परेशानी होती है। परेशानियों को दूर करने के लिए उपाय करना चाहिए। इमरान घर में नाले का पानी घुस जाता है, लेकिन इस परेशानी को दूर करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई उपाय और मदद नहीं की जाती है। बच्चों को स्कूल जाने में गंदे पानी में प्रवेश कर जाना पड़ता है। आंदोलन के पानी की निकासी के लिए अस्थायी व्यवस्था की गयी है। अफताब छोटे व्यवसायियों के व्यापार को बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से सस्ता लोन मिले। बारिश के मौसम में जलजमाव से घर में कैद हो जाने वाली स्थिति बन जाती है। नगर निगम की ओर से सड़क और नाला का निर्माण हो। इसके बिना वार्ड का विकास अधूरा है। दाऊद जलजमाव से स्थायी निजात चाहिए। दूसरे वार्ड के नाले का पानी वार्ड 42 में जमा नहीं हो। इसके लिए सड़क किनारे बड़ा नाला बनाकर पानी निकासी के लिए उसे मुख्य नाला से जोड़ना चाहिए। तब ही यहां के लोगों को राहत मिल सकेगी। रानू बारिश होने पर कमर भर पानी हो जाता है। कोई उपाय नहीं होने के कारण गंदा पानी में चलना और रहना पड़ता है। जरूरतमंदों को आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए। साथ ही महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। नेहाल सबसे बड़ी परेशानी पानी की निकासी की है। सरकार नाला निर्माण के लिए जरूरी प्रयास करे। सड़क का भी निर्माण कराया जाना चाहिए। नाली का पानी घरों में घुस जाता है। इससे परेशानी बढ़ जाती है। समस्या का स्थायी समाधान करने की जरूरत है। असरफ अनगिनत कागजों पर अपने दर्द को बयां कर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने रख चुके हैं, लेकिन इन कागजों के फरियाद को कहीं दबा दिया जाता है। समस्याओं को ले नगर निगम के अधिकारियों के पास जाने पर सुनवाई नहीं की जाती है। सोहेल अख्तर पानी की बात करें या सड़क की या फिर स्ट्रीट लाइट की। यहां तो कुछ भी नहीं है। सफाई के नाम पर जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। सूरज ढलते ही यहां अंधेरा छा जाता है, क्योंकि वार्ड में स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी है। नगर निगम खराब लाइट को भी ठीक कराये। दीपक गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। गंदा पानी सूखता नहीं है, उसमें मच्छर पैदा हो रहे हैं। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है। नगर निगम को इलाके में फॉगिंग करानी चाहिए। बरसात के दिनों में परेशानी बढ़ गयी है। आजाद सड़क में घुटना तक नाली का पानी भरा हुआ था। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। महिलाओं को घुटने तक पानी में आना-जाना पड़ता था। अब प्रशासन के स्तर से योजना बनाने का काम शुरू किया गया है। मनुवर सूरज ढलने के साथ वार्ड में अंधेरा हो जाता है। पोल पर लगी स्ट्रीट लाइट खराब हो गई है। कुछ लाइट बनने के लिए गयी थी, लेकिन अब तक बन कर नहीं आयी है। इस कारण अंधेरे से निजात नहीं मिल सकी है। आबादी के अनुसार लाइट की व्यवस्था करनी चाहिए। अब्दुल क्यूब जलजमाव को लेकर रोड जाम किया गया था। नगर निगम प्रशासन अभी नींद से जागा है। अस्थाई व्यवस्था की गई है, लेकिन स्थाई व्यवस्था की दरकार है। नहीं तो फिर आंदोलन होगा। इसके लिए प्रशासन और नगर निगम जिम्मेवार होगा। समायुद्दीन सप्लाई नल और चापाकल बदबूदार पानी दे रहा है। दोनों का पाइप नाली के पानी में डूब गया है। कुछ चापाकल खराब हो चुके हैं। इसकी मरम्मत नहीं करायी जा रही है। इससे स्थिति खराब होती चली जा रही है। नगर निगम को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। हैदर अली जलजमाव से कई दिनों से बच्चों का स्कूल और ट्यूशन छूट रहा था। बच्चे लोग कमर इतना पानी में स्कूल जाने से कतराने लगे थे। बच्चों की पढ़ाई- लिखाई डिस्टर्ब था। इससे तो अच्छा गांव है। पानी की निकासी होने के बाद अब कुछ राहत मिली है। अजय कुशवाहा लगातार तीन सालों से वार्ड में जलजमाव है। नगर निगम कुंभकर्ण की नींद में सोया रहा। जब लोग सड़क पर उतरे तो प्रशासन के अधिकारी जगे। वार्ड की बनी सड़कें भी जलजमाव से खराब हो चुकी हैं। सड़क पर जगह- जगह गड्ढे हो गए हैं। बाइक से आने-जाने वाले लोग अक्सर गड्ढे में गिर रहे हैं। शहबाज हम लोग का वार्ड बस नाम के नगर निगम में है। सुविधाएं गांव से भी बदतर हैं। रेलवे स्टेशन के पास में वार्ड है, फिर भी किसी का ध्यान नहीं है। वार्ड के विकास के लिए पहल करने की जरूरत है। वार्ड के समग्र विकास के लिए योजना बनाने की जरूरत है। पीर मोहम्मद