बिहिया की बदहाल सड़क और जलजमाव के खिलाफ रोड पर उतरे
बिहिया में नगर पंचायत के निवर्तमान चेयरमैन सचिन कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सड़क किनारे पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना जारी है। प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ लोगों ने बिहिया-बिहटा स्टेट हाईवे पर जाम लगाया। स्थानीय निवासियों ने पहले ही समस्या से अधिकारियों को अवगत कराया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

-पांच दिनों से सड़क किनारे पंडाल लगा अनिश्चितकालीन धरना की सुधि नहीं लेने पर निवर्तमान चेयरमैन का फूटा गुस्सा बिहिया। निज संवाददाता बिहिया नगर पंचायत क्षेत्र के मुख्य मार्ग डाकबंगला रोड की जर्जर स्थिति और जलजमाव की समस्या के खिलाफ नगर पंचायत के निवर्तमान चेयरमैन सचिन कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पिछले पांच दिनों से सड़क किनारे पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना जारी है। प्रशासन की ओर से समस्या की सुध नहीं लेने पर सोमवार को सड़क पर उतर आए।
प्रदर्शन की स्थिति
प्रशासन की उदासीनता के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बिहिया-बिहटा स्टेट हाईवे स्थित डाकबंगला चौक के समीप रोड जाम कर दिया। देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ठेकेदार की कथित लापरवाही को लेकर भी अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्थानीय निवासियों ने न केवल पहले अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया था, बल्कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें भी दर्ज कराई थी। उस समय अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य रहा। कागजों में सिमटी फाइलों और जिम्मेदारों की चुप्पी ने आम जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
जाम समाप्ति की प्रक्रिया
जाम की सूचना पर सड़क विभाग के कनीय अभियंता व एएसआई राजू पांडेय पहुंच कर आश्वासन के बाद लगभग चार बजे जाम समाप्त किया गया। बता दें कि बिहिया का डाकबंगला रोड आज बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है। नाली का पानी इन गड्ढों में जमा हो जाने से स्थिति नारकीय हो गई है। आए दिन यहां वाहन फंस रहे हैं। पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहनों का गुजरना भी दुर्घटनाओं को आमंत्रण देने जैसा हो गया है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह मार्ग केवल सड़क नहीं, बल्कि शहर की जीवन रेखा है। सबसे ज्यादा इसी सड़क से होकर बिहिया पुलिस स्टेशन, प्रखंड सह अंचल कार्यालय, नगर पंचायत कार्यालय, रेलवे स्टेशन, चकबंदी ऑफिस, कस्तूरबा विद्यालय और दर्जनों कोचिंग संस्थानों तक पहुंचते हैं। स्कूली बच्चों और आम जनता के लिए हर दिन यहां से गुजरना चुनौतीपूर्ण और जोखिम बन चुका है。
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