सुरमयी शाम में स्वर लय ताल की सरिता हुई प्रवाहित
आरा में संगीत प्रेमी कृष्णा जी, साहित्यकार रंजीत बहादुर माथुर और संगीतकार अरुण सहाय की स्मृति में एक संगीत सभा का आयोजन किया गया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन, दीप प्रज्ज्वलन के साथ उद्घाटन हुआ, जिसमें शास्त्रीय गायन और कथक नृत्य का प्रदर्शन किया गया। कई संगीत प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित थे।

आरा, निज प्रतिनिधि। संगीत प्रेमी कृष्णा जी, साहित्यकार रंजीत बहादुर माथुर व संगीतकार अरुण सहाय की स्मृति में संगीत सभा का आयोजन किया गया। शिवादी क्लासिक सेंटर ऑफ आर्ट एंड म्यूजिक की ओर से आयोजित तीन दिवसीय संगीत संगीत संध्या के दूसरे दिन कार्यक्रम का उद्घाटन कवियित्री ममता मिश्रा, कवि जनमजय ओझा व रंगकर्मी फिल्म अभिनेता कृष्ण यादव कृष्णेंदु ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। श्रेया पांडेय व अजीत पांडेय ने शास्त्रीय गायन में ख्याल, ठुमरी एवं दादारा की प्रस्तुति से सुरमयी शाम की आगाज किया। कथक नृत्यांगना स्नेहा पांडेय व नन्ही नृत्यांगना सिद्दी के कथक युगलबंदी कर अद्भुत समां बांध दिया।
रंगकर्मी कृष्ण यादव कृष्णेंदु ने कहा कि संगीतकार अरुण सहाय का जीवन संगीत को समर्पित रहा। आरा में फिल्म संगीत के क्षेत्र में उन्होंने बहुमुल्य योगदान दिया है। जन्मेमजय ओझा ने कहा कि संगीत प्रेमी कृष्णा जी का किसी भी आयोजन में प्रथम श्रोता होना उनके संगीत प्रेम को दर्शाता है। कवियित्री डॉ. ममता मिश्रा ने स्व. रंजीत बहादुर माथुर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माथुर जी की साहित्यिक रचना अमर कृति के रूप में विद्यमान है। मंच संचालन बक्शी विकास व धन्यवाद ज्ञापन आदित्या श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डॉ नीलाम्बुज, डॉ. किरण कुमारी, इंदु यादव समेत कई संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

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