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पति को दी मुखाग्नि, फिर श्राद्ध कर्म में जुट गयी सोनामति

आज के पुरुष प्रधान समाज में भी एक ग्रामीण महिला ने पहले तो पति को मुखाग्नि दी और फिर श्राद्ध कर्म में जुट गई। यह वाकया भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के महुआंव गांव का है, जो इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर सफेद साड़ी पहनी सोनामति की आंखों से आंसुओं की धारा बह रही थी। दूसरी ओर सामने मृत्यु शैया पर सोनामति के पति विशंभर मिश्र का शव पड़ा था। एक तरफ पति के जाने का दुख और दूसरी तरफ मुखाग्नि से लेकर कर्मकांड करने की चिंता। मरणोपरांत किए जाने वाले श्राद्ध में पुरुषों की भूमिका रहती है, लेकिन सोनामति को न तो अपनी संतान है और न ही मुखाग्नि देने के लिए कोई अपना रिश्तेदार। अंतत: सोनामति ने साहसिक फैसला लिया और कहा- स्वामी, मैं दिलाऊंगी आपको मुक्ति। इसके बाद मृत पति को प्रेत योनि से मुक्ति के लिए शास्त्रोक्त विधि से न सिर्फ सोनामति ने मुखाग्नि दी बल्कि श्राद्ध संपन्न कराते हुए सारे कर्मकांडों को पूरा करने में खुद ही भूमिका निभाई। सोनामति के इस हौसले की सराहना कई लोग कर रहे हैं। पं विशंभर मिश्र के बारे में बताया जा रहा है कि वह अत्यंत ही निर्धन व्यक्ति थे। जमीन के नाम पर उनके पास अपना कुछ नहीं था। सरकार की ओर से इंदिरा आवास योजना से उनका घर बनवाया गया था। संतान नहीं होने के बावजूद पति-पत्नी अपना जीवन हंसी-खुशी गुजार रहे थे। कर्मकांड के एक विद्वान का कहना है कि समाज भले ही महिलाओं को मुखाग्नि देने और श्राद्ध कार्य में भागीदारी से परहेज करता हो पर हिन्दू धर्म शास्त्र इसकी इजाजत देता है। महिलाएं अपने प्रियजनों के लिए ऐसा कर सकती हैं।

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  • Web Title:lit the pyre to husband, started ritual for shradhkarm