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जगदीशपुर में माले का वोट नहीं मिलने से हारा राजद

जगदीशपुर में माले का वोट नहीं मिलने से हारा राजद

संक्षेप:

जगदीशपुर के पूर्व विधायक रामविशुन सिंह लोहिया ने हार की समीक्षा बैठक में माले सांसद सुदामा प्रसाद और दीपंकर भट्टाचार्य पर आरोप लगाया कि उन्होंने क्षेत्र में समय नहीं दिया। उन्होंने भीतरघात और महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये आने को हार के कारण भी बताया। राजद गठबंधन की हार के पीछे कई कारण बताए गए हैं।

Nov 27, 2025 07:34 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, आरा
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-हार की समीक्षा बैठक के बाद जगदीशपुर के पूर्व विधायक रामविशुन सिंह लोहिया का छलका दर्द -माले सांसद सुदामा प्रसाद और वरीय नेता दीपंकर भट्टाचार्य पर क्षेत्र में समय नहीं देने का लगाया आरोप -पार्टी नेताओं के भीतरधात और महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये आने को भी हार के कारणों में गिनाया जगदीशपुर, निज संवाददाता। भोजपुर में पिछले तीन चुनावों से राजद का गढ़ बन चुके जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार करारी हार के बाद महागठबंधन का आपसी मतभेद सतह पर आ गया है। बुधवार को महागठबंधन समर्थित राजद प्रत्याशी किशोर कुणाल की हार की समीक्षा पूर्व राजद विधायक राम विशुन सिंह लोहिया की मौजूदगी में की गई।

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पूर्व विधायक राम विशुन सिंह लोहिया ने हार की समीक्षा के बाद चार प्रमुख कारण गिनाये। कहा कि माले का वोट महागठबंधन प्रत्याशी को नहीं मिला। जब यहां 2015 में माले ने अकेले चुनाव लड़ा था, तो पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह को करीब 18 हजार से अधिक वोट मिले थे। यह वोट नहीं मिलने से जीत वाली मानी जाने वाली जगदीशपुर विधानसभा सीट पर भी इस बार महागठबंधन की हार हो गई। हालांकि पूर्व विधायक के आरोपों पर अभी भाकपा माले का पक्षा नहीं मिल पाया है। माले अभी इस पर किसी प्रकार की टिप्पणी से बच रहा है। मैंने यादव का वोट सुदामा प्रसाद को दिलाया पर वे जगदीशपुर में नहीं आये पूर्व विधायक राम विशुन सिंह लोहिया ने इसके लिए खुले तौर पर आरा के भाकपा माले सांसद सुदामा प्रसाद और वरीय नेता दीपंकर भट्टाचार्य पर आरोप लगाया कि उन लोगों ने उनके क्षेत्र में समय नहीं दिया। कहा कि लोकसभा चुनाव में मैंने खुद चार गाड़ी लेकर छह दिन तक मेहनत से प्रचार-प्रसार किया, क्योंकि मुझे लग रहा था कि मेरे विधानसभा से सांसदी में यादव का वोट आरके सिंह को न मिल जाये। माले को यादव का वोट नहीं मिलेगा तो मेरी बदनामी होगी। पर सांसद को इसकी परवाह नहीं रही। सांसद सुदामा प्रसाद जगदीशपुर, बड़हरा, शाहपुर कहीं भी प्रचार करने नहीं घूमे। यही नहीं जगदीशपुर विधानसभा के पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह सहित माले के दिग्गज कार्यकर्ताओं को चुन-चुन कर तरारी विधानसभा क्षेत्र में लगा दिया गया। लिहाजा जगदीशपुर विधानसभा के अगिआंव बाजार, देवराढ़ सहित कई बूथ जो माले वोटरों के गढ़ हैं, जहां लोकसभा सहित पिछले चुनावों में महागठबंधन को भारी जीत मिलती रही है। पर इस बार वहां विरोधी को मत मिले हैं। पार्टी नेताओं पर भी भितरघात का आरोप लगाया पूर्व विधायक राम विशुन सिंह लोहिया ने अपनी पार्टी राजद के नेताओं पर भी चुनाव में भीतरधात करने का आरोप लगाया। ऐसे लोगों ने 2015 और 2020 में भी भीतरघात किया था। पहले निर्दलीय प्रत्याशी पिंकू जी को खड़ा कराया। देखा कि उन्हें वोट नहीं मिल रहा है तो तीर में वोट पलटवा दिया। ये सभी चिह्नित हो चुके हैं। इसकी शिकायत पार्टी के आलाकामान तक को कर दी गई है। प्रचार में कम समय मिलना और आचार संहिता में भी खाते में पैसा जाना भी कारण पूर्व विधायक ने बताया कि एक तो चुनाव प्रचार का कम समय मिला। उसमें भी चार दिन तक मोंथा चक्रवात ने खलल डाल दिया। जोर देकर कहा कि एक तरफ हम लोग नियम का पालन कर आचार संहिता लगने पर गाड़ी से बोर्ड तक निकाल दिये, जबकि सरकार जीविका के माध्यम से वोट के तीन दिन पहले तक महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये डलवाती रही। बूथों पर बड़ी चालाकी से जीविका के माध्यम से वोट एनडीए के पक्ष में कराया गया। महिलाओं का एक प्रकार से वोट खरीद लिया गया। 2010 में एनडीए की लहर में भी राजद ने जदयू से छीनी थी यह सीट बिहार में एनडीए पार्ट एक की सरकार के उल्लेखनीय कार्यों के बाद 2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की लहर के बाद भी राजद ने यह सीट जदयू से छीन ली थी और तब से पिछले चुनाव तक यहां राजद की जीत की हैट्रिक लगी थी। हालांकि भाकपा माले से गठबंधन के बाद भी इस बार राजद जीत का चौका लगाने में यहां विफल रहा। जदयू के श्रीभगवान सिंह की 15 साल बाद यहां वापसी हो गई।