अंतिम तिथि करीब, फिर भी महज 16 फीसदी गेहूं की बुआई

Dec 12, 2025 08:41 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, आरा
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- जिले के कई इलाकों के खेतों में अब भी नमी बरकरार, निचले इलाके में पानी, दिसंबर के अंतिम समय तक भी

अंतिम तिथि करीब, फिर भी महज 16 फीसदी गेहूं की बुआई

- जिले के कई इलाकों के खेतों में अब भी नमी बरकरार, निचले इलाके में पानी - दिसंबर के अंतिम समय तक भी शत-प्रतिशत बोअनी की उम्मीद नहीं दिख रही - कई इलाकों के खेतों में लगी धान की फसल की अब भी चल रही है कटनी - जिले में एक लाख दो हजार 914 हेक्टेयर में लक्ष्य, 17107 हेक्टेयर ही बुआई आरा, हमारे संवाददाता। कृषि विभाग की ओर से 15 दिसंबर तक विलंब से गेहूं की बुआई की निर्धारित अंतिम तिथि में दो दिन ही शेष बचे हैं, लेकिन भोजपुर जिले में महज 16 फीसदी ही बोअनी हो पाई है।

जिले के अलग- अलग प्रखंडों में अब भी खेतों में नमी बरकरार है। यही नहीं कई निचले इलाकों में पानी लगा है। हालात देख ऐसी आशंका है कि दिसंबर के अंतिम समय तक भी शत-प्रतिशत बोअनी नहीं हो पाएगी। वहीं कई इलाकों में खेतों में धान की फसल लगी है, जहां कटनी चल रही है। विभाग की ओर से जिले में एक लाख 2914 हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला कृषि कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि बीते 11 दिसंबर तक 17107 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई है। गेहूं की खेती में विलंब को लेकर किसान चिंतित हैं। समय से बुआई नहीं होने के चलते इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। कृषि विभाग के अनुसार 15 नवंबर से लेकर विलंब तक 15 दिसंबर ही गेहूं बुआई का आदर्श समय माना जाता है। जिले में बेमौसम अतिवृष्टि, हवा एवं तीन बार आई विनाशकारी बाढ़ के कारण जिले के किसान खरीफ की फसल तो पहले ही गंवा दिए हैं, अब रबी की खेती पर भी संकट बना है। इस तरह जिले के किसान इस साल प्रकृति की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। इसमें बुआई की गति अत्यंत ही धीमी है। जिला कृषि विभाग एवं किसानों की ओर से बताया गया कि दिसंबर महीने तक इस साल बुआई चलेगी। कारण कि गंगा नदी की बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण निचले इलाके के खेतों में अभी अधिक नमी है। कहीं- कहीं पर तो खेतों में छिछला पानी लगा है। - विलंब से गेहूं की बुआई से उत्पादन पर पड़ेगा असर जिले के गेहूं उत्पादक किसान इस बार अपनी गेहूं की फसल की उपज को लेकर भी काफी परेशान हैं। गेहूं की समय से बुआई नहीं होने की आशंका देख चिंतित हैं। वहीं जिला कृषि कार्यालय भी इस बात को लेकर चिंतित दिख रहा है। लागत खर्च की तुलना में किसानों को उपज की कमी का सामना करने की चिंता सता रही है। जिले में बाढ़, बेमौसम बारिश, आंधी से खरीफ फसल को काफी क्षति हुई है। - किसानों का दर्द कृषि विभाग की ओर से निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की लगातार कोशिश की जा रही है। परंतु, अभी की स्थिति को देखते हुए सफलता नजर नहीं आ रही है। बिहिया प्रखंड के किसान राजेंद्र मनियारा ने बताया कि खेतों में इतनी नमी है कि जुताई संभव नहीं है। धान की कटनी भी बाधित है, क्योंकि हार्वेस्टर खेतों में उतरते ही फंस जा रहा है। इसके साथ ही डीएपी, पोटाश और उरिया उचित मूल्य पर नहीं मिल रही है। 100- 200 रुपये प्रति बोरी अधिक दाम लेकर बेची जा रही है। इसी प्रखंड के तीयर गांव के किसान भीम यादव ने बताया कि धान पूरी तरह नहीं कट पाया है और गेहूं बोने का मुख्य समय 15 नवंबर से 15 दिसंबर है। मार्च में मौसम तीखा हो जाता है, जिससे दाना छोटा रह जाता है। बीज भी उपलब्ध नहीं है और जो मिला वह अच्छा नहीं था। बिमवा के किसान कमलेश यादव कहते हैं कि बाज़ार में बी 343 किस्म का बीज किसान लेना नहीं चाह रहे। सरकार को चाहिए कि अब जब बुवाई में देरी हो चुकी है, तो मौसम के अनुसार अंकुरण योग्य देरी वाली किस्मों का बीज उपलब्ध कराए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। आरा सदर के किसान बड़क पांडेय, रामदेव पांडेय, पिंटू पांडेय और पीरो के किसान इंदल पासवान ने कहा कि इस बार गेहूं की बुआई पर संकट है। दलहनी फसल की खेती भी नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस वर्ष जिले में बाढ़ और बेमौसम बारिश के कारण यह समस्या उत्पन्न हो गई है। यूरिया, डीएपी और जैविक उर्वरकों की महंगाई भी किसानों के लिए बड़ी समस्या है। - कोट 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक गेहूं बुआई का सही समय माना जाता है। जिले में बेमौसम अतिवृष्टि, हवा एवं तीन बार आई बाढ़ के कारण गेहूं की बुआई में गति धीमी है। जिले में इस साल एक लाख 2914 हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से अब तक 16 फीसदी बुआई हुई है। दलहनी फसल में भी स्थिति ठीक नहीं है। मौसम को देखते हुए किसान पूरे दिसंबर तक गेहूं की बुआई करेंगे। डॉ. नीरज कुमार जिला कृषि पदाधिकारी, भोजपुर - खेतों में नमी से किसान परेशान, धान कटनी 40 फीसदी पर ही अटकी जगदीशपुर, निज संवाददाता भोजपुर के जगदीशपुर अनुमंडल में बिहिया, जगदीशपुर और शाहपुर के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मोंथा चक्रवात के भारी बारिश से खेतों में अब तक नमी बनी हुई है। इससे धान की कटनी और गेहूं की बुवाई दोनों पर असर पड़ा है। किसान खेतों में मशीनें नहीं ले जा पा रहे और मजदूर भी कम पड़ रहे हैं। जगदीशपुर के उत्तरदाहा निवासी किसान विनोद कुशवाहा बताते हैं कि बारिश के चलते धान की 40% कटनी अभी बाकी है। गेहूं की बुआई मात्र 50% ही हो पाई है। किसानों का कहना है कि रबी सीजन में भारी नुकसान तय है।

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