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21 अक्तूबर, 2020|12:56|IST

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ठांय-ठांय : होती रही धरपकड़, चलती रहीं गोलियां

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ठांय-ठांय...। जी हां, भोजपुर में बात-बात पर गोली चल जाती है। ताबड़तोड़ हो रही गोलीबारी की घटनाओं ने इसे सच साबित कर दिया है। सिर्फ सितंबर माह में गोलीबारी की 17 घटनायें हुईं। इस दौरान करीब तीन दर्जन लोगों को गोली मारी गयी। इनमें पांच लोगों की मौत हो चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक शहर से लेकर गांव तक पूरे माह ठांय-ठांय होती रही। कभी एक-दो दिन के अंतराल पर तो कभी लगातार। महत्वपूर्ण बात यह कि अधिकतर घटनायें दिन में हुई हैं। इस दौरान दुकानदार, छात्र, बुजुर्ग और नेता तक को निशाना बनाया गया। यह स्थिति तब है, जब अपराधियों की ताबड़तोड़ धरपकड़ हो रही है। चुनाव का बिगुल बज गया है। आम तौर पर चुनाव के दरम्यान चुनावी विवाद व हिंसा को छोड़ अन्य तरह की वारदातों में कमी आती है। ऐसे में गोलीबारी की घटनाओं पर रोक लगाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है। वैसे तो भोजपुर बहुत पहले से ही बात-बात में गोली चलाये जाने को लेकर बदनाम रहा है। यहां हत्या जैसी घटनायें भी अक्सर होती रहती हैं। लेकिन, हाल के दिनों में फायरिंग और हत्या की घटनाओं में काफी तेजी आ गयी है। एसपी हर किशोर राय के भोजपुर में आने और धरपकड़ अभियान शुरू किये जाने से ताबड़तोड़ फायरिंग व हत्या की घटनाओं पर रोक लगने की उम्मीद थी। इस दौरान पुलिस ने कुछ बड़े और कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार भी किया। इसके बाद उम्मीद और भी बढ़ गयी थी। लेकिन, लगातार हो रही फायरिंग की घटनाओं ने पुलिस की सफलता को न केवल ढंक दिया है, बल्कि पुलिस की चुनौती भी बढ़ा दी है।

31 अगस्त की रात से शुरू हुई फायरिंग, तो होती ही चली गयी

बता दें 31 अगस्त की रात सरैयां में किराना दुकानदार को गोली मार दी गयी थी। चार सितंबर की रात सहार थाना क्षेत्र के एकवारी गांव में ससुर व बहू को गोली मार दी गयी। इसमें ससुर की मौत हो गयी। अगले दिन यानी पांच सितंबर को आरा शहर के केजी रोड में एक चाय दुकानदार को गोली मार दी गयी। पांच दिन तक मामला शांत रहने के बाद 10 सितंबर को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के जगवलिया छलका के पास तीन दोस्तों को गोली मार दी गयी। इसमें एक की जान चली गयी। फिर 11 सितंबर को शहर के काजी टोला तो 16 सितंबर को रौजा मोहल्ले में किशोर को गोली मार दी गयी। 18 सितंबर को सहार थाना क्षेत्र के एकवारी गांव में पूर्व के विवाद में दरवाजे पर बैठे बुजुर्ग को गोली मार दी गयी थी। इसके ठीक अगले दिन 19 सितंबर को बाइक की टक्कर होने पर हसन बाजार में एक युवक को गोली मार दी गयी। इस दौरान जमकर फायरिंग भी की गयी, जिसकी चपेट में एक यात्री बस भी आ गयी थी। लेकिन, बस में सवार यात्री बाल-बाल बच गये थे। 20 सितंबर को भी धनगाईं थाना क्षेत्र के शिवपुर गांव के समीप एक ऑटो चालक को गोली मार दी गयी थी। इसके बाद फिर 23 सितंबर को शहर में रेडक्रॉस भवन के पास दिनदहाड़े एक युवक को गोली मार दी गयी। अभी पुलिस उस मामले की छानबीन कर ही रही थी कि 24 सितंबर को बड़हरा थाना क्षेत्र में एक कोचिंग संचालक को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। 25 सितंबर को शहर के मोती टोला में एक युवक को गोली लग गयी। 27 को शहर के ही जगदेवनगर में युवा जदयू के राष्ट्रीय सचिव सहित दो को गोली मार दी गयी। इसमें एक जमीन कारोबारी की मौत हो गयी। 28 सितंबर को कोईलवर के दुर्जनचक गांव में जमकर गोलीबारी हुई। उसमें दर्जन भर लोगों को गोली लगी और एक की मौत हो गयी। 29 की शाम शहर के तरी मोहल्ले मे एक छात्र को गोली मार दी गयी, तो 30 सितंबर को फिर एक युवक को गोली लग गयी।

गोलियों से भून देने और एक साथ दो या अधिक लोगों को गोली मारने की घटनायें बढ़ीं

जिले में अपनी दुश्मनी का बदला लेने या निकालने के लिये विरोधियों को गोलियों से भून देने की वारदात बढ़ गयी है। एक साथ दो या अधिक लोगों को को गोली मारने की घटना भी खूब हुई है। बता दें कि चार सितंबर की रात सहार थाना क्षेत्र के एकवारी गांव में ससुर व बहू को गोली मार दी गयी थी। नौ सितंबर की रात बर्थडे पार्टी से लौट रहे तीन दोस्तों पर अंधाधुंध फायरिंग की गयी थी। उसमें एक छात्र की मौत हो गयी थी। 24 सितंबर को बड़हरा के बिराहिमपुर के पास कोचिंग संचालक को भी ताबड़तोड़ चार गोलियां मारी गयी थी। इसी तरह 27 सितंबर को जगदेवनगर में दो जदयू नेताओं को गोलियों से भून दिया गया था। इसमें एक की मौत हो गयी थी। कोईलवर थाना क्षेत्र के दुर्जनचक में दो पक्षों के बीच जमकर गोलियां चलीं। इसमें एक साथ दर्जन भर लोग जख्मी हो गये, जबकि एक की मौत हो गयी।

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  • Web Title:Fain-frantic Grabbing firing bullets