बचरी : श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के छठे दिन संतों का कुंभ
स्थानीय बीएसएस कॉलेज बचरी में आयोजित श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के छठे दिन संत सम्मेलन हुआ। संतों के दर्शन और पूजन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। यज्ञाधीश श्री गोविंदाचार्य जी महाराज के मार्गदर्शन में संतों ने धर्म और अध्यात्म पर प्रकाश डाला। पूर्णाहुति और भंडारे की तैयारियां चल रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह है।

-संत सम्मेलन से लघु काशी बना बचरी का यज्ञ स्थल, संतों के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े पीरो, संवाद सूत्र। स्थानीय बीएसएस कॉलेज बचरी के खेल मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ अंतिम पड़ाव पर है। सोमवार को यज्ञ के छठे दिन आयोजित भव्य संत सम्मेलन ने इस महायज्ञ की भव्यता में चार चांद लगा दिया। संतों के दर्शन और पूजन के लिए न केवल स्थानीय बल्कि आसपास के जिलों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। संत सम्मेलन में भाग लेने के लिए अयोध्या, काशी, मथुरा और वृंदावन जैसे पावन धामों सहित देश के कोने-कोने से सैकड़ों संतों का आगमन हुआ।
यज्ञाधीश श्री गोविन्दाचार्य जी महाराज की देखरेख में आयोजित इस समागम में संतों ने धर्म और अध्यात्म पर प्रकाश डाला। यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते श्रद्धालुओं और संतों के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचक श्री रामदयाल शरण जी महाराज की अमृतमयी वाणी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने प्रवचन में कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं बल्कि समाज के शुद्धिकरण और विश्व शांति का सशक्त माध्यम है। आज पूर्णाहुति पर विशाल भंडारा महायज्ञ के समापन यानी सात अप्रैल को होने वाली पूर्णाहुति को लेकर उत्साह चरम पर है। मंगलवार को आहुतियों के साथ सात दिवसीय इस यज्ञ का विधिवत समापन होगा। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि भंडारे के लिए विशाल रसोई तैयार की गई है, जहां भारी मात्रा में शुद्ध घी और सामग्रियों से प्रसाद बनाया जा रहा है। इसके लिए सैकड़ों स्वयंसेवक दिन-रात व्यवस्था को सुदृढ़ करने में जुटे हैं। रोशनी से जगमगाया परिसर और मेले की रौनक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ यज्ञ स्थल पर सुरक्षा और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिल रहा है। पूरे बीएसएस कॉलेज परिसर को आकर्षक लाइटिंग से सजाया गया है। रात के समय रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया हुआ यज्ञ मंडप किसी देवलोक जैसा प्रतीत होता है। यज्ञ के साथ-साथ ही यहां लगा भव्य मेला स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। मेले में बड़े-बड़े झूले, ब्रेक डांस, चरखा, जलपरी और बच्चों के लिए मिकी माउस जैसे कई मनोरंजन के साधन उपलब्ध हैं।खाने-पीने की दुकानें, खिलौनों के स्टॉल और घरेलू सामानों की दुकानें सजी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पूरे परिवार के साथ यहां मेले का आनंद ले रहे हैं। समिति और प्रशासन की मुस्तैदी भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस और यज्ञ समिति के वालंटियर्स लगातार गश्त कर रहे हैं। पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और पार्किंग की भी समुचित व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। बचरी का यह महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना है बल्कि इसने आपसी भाईचारे और सामूहिकता की अनूठी मिसाल पेश की है। आज होने वाली पूर्णाहुति के साथ ही इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन होगा, जिसे लेकर श्रद्धालु भावुक हैं और उत्साहित भी।
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