वर्तमान में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जागरूक रहने की जरूरत
-महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय में कैम्पस क्लाइमेट वार्तालीप आयोजित, रेजिलिएन्ट माइंड्स फाउंडेशन के सहयोग से कैंपस क्लाइमेट वार्तालीप का आयोजन किया गया

-महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय में कैम्पस क्लाइमेट वार्तालीप आयोजित आरा। निज प्रतिनिधि शहर के महंथ महादेवानंद महिला महाविद्यालय के सभागार में इकोलॉजिकल क्लब की ओर से रेजिलिएन्ट माइंड्स फाउंडेशन के सहयोग से कैंपस क्लाइमेट वार्तालीप का आयोजन किया गया। प्राचार्य प्रो. डॉ . नरेंद्र प्रताप पालित, रेजीलिएन्ट फाउंडेशन की संस्थापक लक्ष्मी मेहता, सह संस्थापक अभिषेक कुमार, इकॉलोजिकल क्लब की कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रीति कुमारी व क्लब की सदस्य डॉ. तसनीम फातमा की ओर से दीप प्रज्ज्वलित किया गया। छात्रा जूही, जागृति ,अंजलि, सुनिधि और प्राची ने स्वागतगान प्रस्तुत किया। इकोलॉजिकल क्लब की कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रीति कुमारी ने कैंपस क्लाइमेट वार्तालीप की आवश्यकता बताते हुए पर्यावरण से सम्बंधित चिंताएं व भारत व विश्व में पर्यावरण से सम्बंधित किए जा रहे प्रयास व आगामी सुझाव पर अपनी बात रखी।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. नरेंद्र प्रताप पालित ने सभी को वर्तमान पर्यावरण समस्याओं से परिचित कराया व सभी छात्राओं को पर्यावरण के प्रति सचेत किया। छात्राओं को इस तरह के कार्यक्रम में निरंतर भाग लेने व पर्यावरण के प्रति संवेदनशील, जागरूक रहने व लगातार व्यावहारिक रूप से इसके लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया। फाउंडेशन की संस्थापक लक्ष्मी मेहता व सह संस्थापक अभिषेक कुमार ने रेजीलिएन्ट माइंड्स फाउंडेशन व कैम्पस क्लाइमेट वार्तालीप के उद्देश्य से सभागार में उपस्थित सभी शिक्षकों व छात्राओं को परिचित कराया। उन्होंने छात्राओं के साथ वार्तालाप कर सभी छात्राओं को विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखने को प्रेरित किया। इससे आसपास घट रही घटनाओं व अपने कैम्पस के प्रति छात्राओं को जागरूक किया जा सके। उन्होंने छात्राओं के साथ विभिन्न एक्टिविटी की और छात्राओं को व्यावहारिक रूप से पर्यावरण की सुरक्षा व माहवारी में मेंस्टुरल कप के प्रयोग के सम्बंध में जागरूक व प्रोत्साहित किया । उन्होंने सभी छात्राओं व शिक्षकों से अंत में एक स्टिक नोट पर दैनिक जीवन में पर्यावरण से सम्बंधित एक नवीन व्यावहारिक बदलाव की प्रतिज्ञा को अपने बैनर पर लगवाया। धन्यवाद ज्ञापन इकॉलोजिकल क्लब की कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रीति कुमारी ने किया। ----------- प्लास्टिक के इस्तेमाल पर लगे पूर्णतः रोक आरा। प्लास्टिक के दुष्प्रभाव और रोकथाम को लेकर महात्मा गांधी नगर संगोष्ठी आयोजित की गई। मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार तिवारी मुनमुन ने कहा कि शहर की सड़कें, नालियां, गलियां, मैदान और यहां तक कि खेत भी अब प्लास्टिक के कचरे से अछूते नहीं बचे हैं। हर दिन निकलने वाले 60 से 70 टन कचरा में करीब 10 टन केवल प्लास्टिक का कचरा होता है। यह आंकड़ा जितना बड़ा है, उससे भी कहीं अधिक बड़ा है इसका दुष्प्रभाव है। प्लास्टिक न तो मिट्टी में घुलता है न ही पानी में और न ही समय के साथ खत्म होता है। बल्कि यह हवा पानी मिट्टी और जीवों के जीवन में धीरे-धीरे जहर लाता जा रहा है। सबसे पहले असर नालियों पर पड़ता है। नालियों पर जो प्लास्टिक थैलियां और रैपरों से जाम हो जाता है। बरसात होने के साथ ही शहर के कई वार्डों में पानी सड़कों पर भर जाता है। सड़क किनारे यत्र-तत्र प्लास्टिक का कचरा मवेशी गाय का भोजन बन जाती है। जिला प्रशासन इस पर रोक लगाए। मौके पर डॉ अमित कुमार द्विवेदी, शशि भूषण गोंड, राजेश पांडे, ब्रजेश कुमार, राकेश चौधरी सहित अन्य थे।

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