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स्कूलों में हेडमास्टर की पोस्टिंग नहीं होने पर वरीय को प्रभार

स्कूलों में हेडमास्टर की पोस्टिंग नहीं होने पर वरीय को प्रभार

संक्षेप:

बिहार में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में प्रधान शिक्षक की नियुक्ति न होने पर, वरीय शिक्षक को प्रभार दिया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा के उप निदेशक ने यह निर्देश दिया है कि शिक्षकों की प्राथमिकता तय करने के लिए मापदंड जारी किए गए हैं। इसके तहत परीक्षा पास करने वाले शिक्षक प्रधान शिक्षक के पद पर नियुक्त होंगे।

Dec 28, 2025 09:14 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, आरा
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आरा, हिप्र.। प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में प्रधान शिक्षक या हेडमास्टर की पोस्टिंग नहीं होने की स्थिति में वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्कूल के वरीय शिक्षक को प्रधान शिक्षक व हेडमास्टर का प्रभारी घोषित किया जायेगा। इस क्रम में शिक्षकों के अंतर वरीयता के निर्धारण के लिए जरूरी मापदंड जारी किया गया है। प्राथमिक शिक्षा के उप निदेशक ने इस संबंध में डीईओ को निर्देश दिया है। बबन प्रसाद सिंह व अन्य बनाम बिहार सरकार के मामले में निर्देश जारी किया गया है। उप निदेशक की ओर से बताया गया है कि बिहार प्रारंभिक विद्यालय प्रधान शिक्षक नियमावली 2024 के तहत प्राथमिक विद्यालय में प्रधान शिक्षक का एक पृथक संवर्ग सृजित किया गया है।

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इस नियमावली के नियम में अंकित है कि प्रधान शिक्षक की नियुक्ति नियमावली के नियम में परिभाषित शिक्षकों से आयोग की ओर से आयोजित परीक्षा के माध्यम से की जायेगी। लेकिन, बिहार राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई व प्रोन्नति नियमावली से आच्छादित शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने की बाध्यता नहीं होगी। वे पात्रता व रिक्ति की उपलब्धता के अधीन प्रोन्नति के माध्यम से प्रधान शिक्षक बन सकेंगे। प्रधान शिक्षक का संदर्भ मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक से है जिसपे प्रोन्नति का प्रावधान है। नियमावली में वर्णित अहर्ताधारी शिक्षक की ओर से बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से प्रकाशित विज्ञप्ति में शामिल होकर प्रतियोगिता परीक्षा पास करने के बाद प्रधान शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए है। मालूम हो कि प्रावि चंदवा के अमृता सिंह व अन्य उप निदेशक को आवेदन मिला था। इसमें अंकित था कि नियमित शिक्षक बीपीएससी की ओर से चयनित वर्ष 1994 व 1999 के शिक्षकों को स्कूल में मौजूद रहने के बाद भी प्रधान शिक्षकों की पदस्थापना की गयी है। डीईओ को विभागीय आदेश के आलोक में कार्रवाई कर वाद में प्रतिशपथ दायर करने के लिए कहा गया था ताकि अवमाननावाद की स्थिति उत्पन्न नहीं हो।