अंजलि आनंद बर्खास्त, 10 और राजस्व अधिकारियों पर गिरी गाज; बिहार में अब तक 42 पर ऐक्शन
बिहार में 10 और सीओ एवं राजस्व पदाधिकारियों पर गाज गिरी है। राजस्व विभाग की ओर से मंगलवार को एक और आदेश जारी किया गया। इसमें एक महिला अफसर को बर्खास्त कर दिया गया। अब तक कुल 42 पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
बिहार की सम्राट चौधरी सरकार लापरवाह और भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों पर ऐक्शन जारी है। लापरवाही, अनियमितता, कर्तव्यहीनता और विभागीय निर्देशों की अवहेलना के मामलों में 10 और राजस्व पदाधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने मंगलवार को इसकी मंजूरी दे दी। समस्तीपुर में प्रभारी सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी रहीं अंजलि कुमारी आनंद को सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी गई है। सरकार का कहना है कि वह जुलाई 2021 से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित थीं और विभागीय कार्यवाही में भी सहयोग नहीं कर रही थीं।
इसके अलावा छपरा सदर की सीओ (अंचलाधिकारी) कुमारी आंचल, अविनाश कुमार (पूर्व सीओ, बोधगया) और अस्थावां के सीओ रविंद्र कुमार चौपाल, पश्चिम चंपारण के अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार, ज्ञानींद्र (पूर्व सीओ, मोकामा), मधेपुर सीओ कौशिका कुमारी, हथुआ सीओ नारायण रजा, गया सदर के राजस्व पदाधिकारी राम कुमार सुमन और गयाजी के सहयाक बंदोबस्त पदाधिकारी संजीव कुमार के खिलाफ भी अलग-अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि कुमारी आंचल, रविंद्र कुमार चौपाल और राकेश कुमार को फटकार (निंदन दंड) लगाई गई है। अविनाश कुमार का एक अप्रेजल रोक दिया गया है। कौशिका कुमारी को चेतावनी जारी की गई है। वहीं ज्ञानींद्र, नारायण राजा और संजीव कुमार के खिलाफ आरोप-पत्र गठित किए गए हैं। राम कुमार रमन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने का फैसला लिया गया है।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार, अनियमितता, कर्तव्यहीनता और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। जनता से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
बता दें कि इससे पहले भी विभाग 32 अंचल अधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। हाल ही में राजस्व अधिकारी सोनी कुमारी को भी सेवा से बर्खास्त किया गया था। अब तक कुल 42 अफसरों के खिलाफ सरकार ऐक्शन ले चुकी है। आने वाले दिनों में इसकी संख्या और बढ़ सकती है।
विभाग के अनुसार दाखिल-खारिज, जमाबंदी, सरकारी भूमि संरक्षण, भू-हदबंदी, भू-अभिलेख तथा सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और समीक्षा में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


