
लालू परिवार में जंग के बीच चर्चा में आए रमीज का क्या है बृजभूषण शरण सिंह वाला कनेक्शन? कहां निशाना
संक्षेप: बृजभूषण शरण सिंह का वर्चस्व और दबदबा जहां गोंडा, बहराइच और कैसरगंज इलाकों में था तो रिजवान जहीर का वर्चस्व बलरामपुर और श्रावस्ती इलाकों में था। एक तरह से कहें तो दोनों बाहुबलियों के बीच इलाके बंटे हुए थे।
बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के घर में सियासी और पारिवारिक संग्राम छिड़ा हुआ है। लालू यादव को किडनी दान देने वाली बेटी रोहिणी आचार्य पिछले दिनों परिवार में विवाद बढ़ने के बाद न सिर्फ लालू-राबड़ी आवास छोड़कर चली गईं बल्कि उन्होंने इस फसाद के लिए अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के दो सलाहकारों को लपेटा है। उनमें एक नाम संयज यादव का है, जो हरियाणा के रहने वाले हैं और राजद कोटे से राज्यसभा सांसद हैं। वहीं दूसरे सलाहकार रमीज़ नेमत हैं, जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। रमीज और तेजस्वी डीपीएस में साथ-साथ पढ़ते थे और क्रिकेट खेला करते थे।

रमीज की पहचान न सिर्फ तेजस्वी के बचपन के दोस्त और साथ-साथ क्रिकेट खेलने वाले की है बल्कि वह नई दिल्ली के उसी इलाके के वासी हैं, जहां तेजस्वी की पत्नी राजश्री का घर है। इतना ही नहीं उनकी शादी उत्तर प्रदेश के एक ऐसे परिवार में हुई है, जो न सिर्फ राजनीतिक वर्चस्व के लिए जाना जाता है बल्कि भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सियासी प्रतिद्वंद्विता के लिए भी जाना जाता है।
रमीज़ रिजवान जहीर के दामाद
दरअसल, रमीज उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद रिजवान जहीर के दामाद हैं। उत्तर प्रदेश में रिजवान जहीर और बृजभूषण शरण सिंह की बीच राजनीतिक अदावत पुरानी है। ये दोनों ही नेता पूर्वांचल के बाहुबली माने जाते रहे हैं। कहा जाता है कि देवीपाटन इलाके की राजनीति इन्ही दोनों बाहुबलियों के ईद-गिर्द घूमती है। बृजभूषण शरण सिंह का वर्चस्व और दबदबा जहां गोंडा, बहराइच और कैसरगंज इलाकों में था तो रिजवान जहीर का वर्चस्व बलरामपुर और श्रावस्ती इलाकों में था। एक तरह से कहें तो दोनों बाहुबलियों के बीच इलाके बंटे हुए थे।
सिंह और जहीर में बढ़ती रही सियासी दुश्मनी
रिजवान जहां समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी संग राजनीति करते रहे, वहीं बृजभूषण शरण सिंह भाजपा के दिग्गज नेता रहे हैं। हालांकि,बीच में वह सपा के साथ भी रहे हैं। वह गोंडा और कैसरगंज से सांसद रहे हैं। जब 2004 में भाजपा ने बलरामपुर सीट से सिंह को उम्मीदवार बनाया तो दोनों बाहुबलियों के बीच सियासी खाई और चौड़ी हो गई। हालांकि, ये चुनाव सिंह ने जीत ली। इससे दोनों गुटों के बीच सियासी दुश्मनी और बढ़ गई।
ससुर की सियासी विरासत बढ़ाने आए रमीज़
2009 के लोकसभा चुनाव में सिंह भाजपा छोड़कर सपा की साइकिल पर चढ़ गए। इसके बाद वह कैसरगंज से चुनाव लड़े और जीते। अब दोनों बाहुबलियों की जंग देवीपाटन तक फैल गई। दूसरी तरफ रिजवान 2004 के बाद कोई चुनाव नहीं जीत सके। वह जेल चले गए। इसके बाद उनकी बेटी जेबा ने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहा। वह दो बार तुलसीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ीं लेकिर दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। अब उनके पति रमीज नेमत जेबा के राजनीतिक वर्चस्व को मजबूत करने और रिजवान जहीर की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने आगे आए हैं।
तेजस्वी से सहारे अखिलेश से नजदीकियां
इस सियासी जंग में 2022 के पंचायत चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के करीबी और तुलसीपुर नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन फिरोज पप्पू की हत्या कर दी गई, जिसमें रमीज नेमत पति-पत्नी दोनों आरोपी बन गए। इस मामले में रमीज फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और 20 नवंबर को इस मामले में फैसला आना है। इस बीच रमीज का राजनीति हाशिए पर चली गई और वह पुराने दोस्त तेजस्वी के सलाहकार के रूप में पटना में जा टिके। आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कहा जा रहा है कि रमीज तेजस्वी के सहारे अखिलेश से करीब होना चाह रहे थे और 2027 के विधानसभा चुनाव में इस बार खुद सपा का टिकट चाह रहे हैं।





