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राजद संग गठबंधन कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा, बोले शकील अहमद; महागठबंधन में होगी टूट?

राजद संग गठबंधन कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा, बोले शकील अहमद; महागठबंधन में होगी टूट?

संक्षेप:

शकील अहमद खान ने कहा कि बिहार में महागठबंधन अब केवल औपचारिक रह गया है। कांग्रेस को राष्ट्रीय जनता दल के साथ बने रहने से न चुनावी लाभ मिल रहा है और न संगठन को मजबूती।

Dec 30, 2025 07:50 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान, पटना
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तो क्या अब महागठबंधन में बड़ी टूट होने वाली है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने कहा है कि राजद से गठबंधन एक घाटे का सौदा है। दरअसल कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता शकील अहमद खान ने एक बार फिर राजद के साथ कांग्रेस की दोस्ती पर ऐतराज जताया है। सोमवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि राजद संग गठबंधन कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा है। साथ ही नेतृत्व को इस दोस्ती पर विचार करने की सलाह दी है।

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शकील अहमद खान ने कहा कि बिहार में महागठबंधन अब केवल औपचारिक रह गया है। कांग्रेस को राष्ट्रीय जनता दल के साथ बने रहने से न चुनावी लाभ मिल रहा है और न संगठन को मजबूती। सीट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति तक कांग्रेस की भूमिका सीमित कर दी गई है। इसका नतीजा यह है कि न पार्टी की सीटें बढ़ रही हैं और न वोट प्रतिशत में कोई ठोस इजाफा हो रहा है। इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है। बयान के बाद महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।

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महागठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप का दौर दिखा

आपको याद दिला दें कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करने वाले विपक्षी खेमे, महागठबंधन, में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। चुनावों में सत्तारूढ़ राजग ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी। इसके कुछ समय बाद कांग्रेस आलाकमान द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली आए कांग्रेस के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा कि पार्टी नेताओं का एक वर्ग अपने पुराने, लेकिन प्रभावशाली सहयोगी राजद के साथ गठबंधन करने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में था।

जिन लोगों ने “61 उम्मीदवारों में से अधिकांश की भावनाओं” का खुलासा किया, उनमें से संयोगवश केवल छह को ही जीत मिली, उनमें से प्रमुख व्यक्ति पिछली विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान थे। शकील अहमद खान ने एक के बाद एक समाचार संस्थानों से कहा था, “हमारे ज़्यादातर उम्मीदवारों की यही राय थी कि अगर हमने राजद के साथ गठबंधन न किया होता, तो हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। भविष्य की रणनीति क्या हो, यह पार्टी आलाकमान को तय करना है।”

कदवा से चुनाव हारे थे शकील अहमद खान

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष खान, जो कांग्रेस में शामिल होने से पहले वामपंथ से संबद्ध एसएफआई में थे, को कदवा विधानसभा क्षेत्र में चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा, जहां से वह लगातार तीसरी जीत की उम्मीद कर रहे थे। यह सीट जदयू के दुलाल चंद्र गोस्वामी ने जीती है, जो पिछले साल के आम चुनावों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर से कटिहार लोकसभा सीट हारने के बाद से राजनीतिक रूप से निष्क्रिय थे।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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